408 करोड़ मुआवजे की समीक्षा, 68 करोड़ का भुगतान बाकी; सामाजिक दायित्व की राशि खर्च न होने और महाप्रबंधक की अनुपस्थिति पर भी फटकार
हल्द्वानी। बहुप्रतीक्षित जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना की धीमी प्रगति और विभिन्न स्तरों पर सामने आई लापरवाहियों को लेकर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अरविन्द कुमार पांडे ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर बुधवार को सीडीओ ने परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान मलबा निस्तारण, पुनर्वास, गुणवत्ता नियंत्रण, सामाजिक दायित्व और निर्माण कार्यों की रफ्तार को लेकर कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिन पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था को फटकार लगाते हुए समयबद्ध सुधार के निर्देश दिए।
निरीक्षण में पाया गया कि परियोजना से निकलने वाले मलबे के निस्तारण के लिए तीन डंपिंग साइटें चिन्हित की गई हैं, लेकिन वर्तमान में केवल एक ही साइट का उपयोग किया जा रहा है। उस स्थल पर भी मलबे का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित तरीके से निस्तारण नहीं हो रहा है। नदी किनारे डाला गया मलबा बारिश के दौरान नदी में बह रहा है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान की आशंका बढ़ गई है। अन्य दो डंपिंग साइटों पर अब तक कार्य शुरू नहीं होने पर सीडीओ ने नाराजगी जताते हुए सभी साइटों को जल्द विकसित कर पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप मलबा निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर) नीति के तहत दिए जा रहे मुआवजे की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि लगभग 408 करोड़ रुपये के कुल मुआवजे में से अभी 68 करोड़ रुपये का भुगतान शेष है। वहीं करीब 12 करोड़ रुपये से जुड़े 14 परिवारों के मामले मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) में लंबित हैं। सीडीओ ने इन मामलों का शीघ्र निस्तारण कर प्रभावित परिवारों को समय पर राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था भी सवालों के घेरे में नजर आई। पता चला कि निर्माण कार्यों की निगरानी करने वाली थर्ड पार्टी एजेंसी पिछले चार से पांच महीनों से साइट का निरीक्षण करने नहीं पहुंची है, जबकि नियमानुसार प्रत्येक तीन माह में निरीक्षण अनिवार्य है। इस पर सीडीओ ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि परियोजना स्थल पर वर्तमान में मैनपावर और मशीनरी निर्धारित क्षमता से कम है, जिसके कारण निर्माण कार्यों की गति प्रभावित हो रही है। वर्ष 2026-27 के तय लक्ष्यों की तुलना में परियोजना पिछड़ रही है। इस पर सीडीओ ने संसाधनों में तत्काल वृद्धि कर निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए पराग फार्म में विकसित की जा रही पुनर्वास कॉलोनी की प्रगति की भी समीक्षा की गई। उन्होंने सभी आवश्यक आधारभूत सुविधाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
कॉर्पोरेट पर्यावरणीय जिम्मेदारी (CER) नीति के तहत प्रभावित क्षेत्र के 19 गांवों में 13 करोड़ रुपये की लागत से 1,175 सोलर लाइटें लगाने की योजना की समीक्षा करते हुए सीडीओ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में कराई जाए। साथ ही पिछले वर्ष लगाई गई सोलर लाइटों का एसडीएम एवं परियोजना अधिकारी उरेडा की संयुक्त समिति से भौतिक सत्यापन कराने और नई सोलर लाइटों की खरीद भी प्रशासन की निगरानी में कराने के निर्देश दिए।
सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत शिक्षा, शौचालय, स्मार्ट क्लास और अन्य विकास कार्यों के लिए पांच वर्षों में निर्धारित 13 करोड़ रुपये की राशि में अब तक केवल 40 लाख रुपये खर्च होने पर भी सीडीओ ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने वर्षवार बजट का स्पष्ट ब्योरा तैयार कर प्रभावित गांवों के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने तथा सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान परियोजना प्रबंधक ललित कुमार, हिमांशु पंत, जिला अर्थ एवं सांख्याधिकारी डॉ. मुकेश नेगी, यूयूएसडीए के परियोजना प्रबंधक कुलदीप कुमार सहित परियोजना से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। हालांकि परियोजना के महाप्रबंधक निरीक्षण के समय मौके पर अनुपस्थित पाए गए, जिस पर मुख्य विकास अधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए जवाबदेही तय करने के संकेत दिए।


