कुमाऊं विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष ने हैदराबाद में ‘पर्यावरण एवं जैव विविधता’ पर दिया विशेष व्याख्यान, जन्मदिन पर एक पौधा लगाने का किया आह्वान

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित वीएनआर वीजेएनआईटी कॉलेज में आयोजित एक शैक्षणिक कार्यक्रम में “पर्यावरण एवं जैव विविधता” विषय पर विशेष आमंत्रित व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के महत्व और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्रकृति के संरक्षण को मानव अस्तित्व के लिए अनिवार्य बताया।

प्रो. तिवारी ने कहा कि पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक जीव जैव विविधता का अभिन्न हिस्सा है और हमारा अजैविक घटकों के साथ संबंध ही पर्यावरण कहलाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन जैव विविधता के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है। जैव विविधता केवल जीव-जंतुओं और पौधों की विविधता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास का मूल आधार भी है।

उन्होंने बताया कि विश्वभर में प्रतिदिन लगभग 40 हजार पौधों एवं जंतुओं की प्रजातियों का विभिन्न रूपों में उपयोग किया जाता है। जैव विविधता को मुख्य रूप से आनुवंशिक, प्रजातीय और पारिस्थितिकीय तीन स्तरों में वर्गीकृत किया जाता है, जिनसे अल्फा, बीटा और गामा विविधता का निर्माण होता है।

प्रो. तिवारी ने कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग, समान भागीदारी और प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि जैव विविधता परागण, मृदा निर्माण, पोषक तत्वों के चक्र तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग 11 प्रतिशत हिस्से से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। वहीं आक्रामक प्रजातियों का प्रसार, प्राकृतिक आवासों का विनाश, संसाधनों का अत्यधिक दोहन और बढ़ता प्रदूषण जैव विविधता के लिए गंभीर संकट बन चुके हैं, जिसके कारण विश्व की लगभग 48,600 प्रजातियां दुर्लभ होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने उत्तराखंड के संदर्भ में जलवायु, जल विज्ञान और पारिस्थितिकी तंत्र के आपसी संबंधों की भी विस्तृत जानकारी दी। साथ ही वन (संरक्षण) अधिनियम 1980, जैव विविधता अधिनियम 2002, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 तथा आईयूसीएन (IUCN) और साइट्स (CITES) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

अपने प्रेरक संदेश में प्रो. तिवारी ने कहा, “जैव विविधता ही जीवन है और प्रकृति के साथ सामंजस्य ही सतत विकास का आधार है। यदि हमें आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रखना है तो प्रकृति से जुड़ना होगा।” उन्होंने सभी से अपील की कि अपने जन्मदिन पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसके संरक्षण का संकल्प लें।

कार्यक्रम के अंत में कॉलेज प्रशासन द्वारा प्रो. ललित तिवारी को अंगवस्त्र एवं पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रो. बेबी, प्रो. रमेश कुमार, डॉ. अहमद सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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