देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित यूकेएसएसएससी भर्ती परीक्षा पेपर लीक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मास्टरमाइंड हाकम सिंह रावत के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी 63.30 लाख रुपये मूल्य की चल एवं अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैच) कर दिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है।
ईडी की जांच में सामने आया कि हाकम सिंह ने भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक कर अभ्यर्थियों से वसूली गई अवैध रकम को बैंक खातों, फर्जी कृषि आय और संपत्तियों में निवेश के माध्यम से वैध दिखाने का प्रयास किया। एजेंसी के अनुसार यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संचालित किया गया, जिसमें प्रिंटिंग एजेंसी के कर्मचारी, बिचौलिए और कुछ लोक सेवक भी शामिल थे।
95 लाख रुपये की अवैध कमाई का खुलासा
वित्तीय जांच के दौरान ईडी ने पाया कि हाकम सिंह ने अभ्यर्थियों से करीब 95 लाख रुपये वसूले। उसके बैंक खातों में घोषित आय से कहीं अधिक नकद जमा मिला। आयकर रिटर्न में उसने बड़ी कृषि आय दर्शाई, लेकिन जांच में उस स्तर की वास्तविक कृषि गतिविधियां नहीं मिलीं।
ईडी का कहना है कि कृषि आय का इस्तेमाल अवैध नकदी को वैध दिखाने के लिए किया गया। अवैध धन को बैंक खातों में जमा कर, आयकर रिटर्न में गलत विवरण देकर तथा कृषि आय के जरिए वित्तीय प्रणाली में शामिल करने की कोशिश की गई।
एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच
ईडी ने बताया कि जांच की शुरुआत वर्ष 2021 की यूकेएसएसएससी स्नातक स्तरीय (वीपीडीओ) परीक्षा पेपर लीक मामले में रायपुर थाने में दर्ज एफआईआर और वर्ष 2016 की भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़ी विजिलेंस सेक्टर देहरादून की एफआईआर के आधार पर की गई।
जांच में खुलासा हुआ कि हाकम सिंह, परीक्षा की प्रिंटिंग एजेंसी आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशंस प्रा. लि. के कुछ कर्मचारियों, लोक सेवकों, बिचौलियों और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह चला रहा था। आरोप है कि यह नेटवर्क गोपनीय प्रश्नपत्र लीक करता, परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर करता और अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें चयन का लाभ पहुंचाने का काम करता था।
14 ठिकानों पर छापे, अहम साक्ष्य बरामद
ईडी ने जांच के दौरान 14 ठिकानों पर तलाशी ली, जहां से संपत्ति संबंधी दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, बैंक रिकॉर्ड और नकदी से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए। पीएमएलए की धारा-50 के तहत दर्ज बयानों, बैंक खातों के विश्लेषण और एसआईटी की चार्जशीटों ने भी हाकम सिंह और उसके सहयोगियों की भूमिका की पुष्टि की।
एजेंसी पहले ही विशेष पीएमएलए अदालत, देहरादून में अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है, जिसमें प्रिंटिंग एजेंसी के कर्मचारी, लोक सेवक, बिचौलिए और अन्य आरोपियों को भी नामजद किया गया है। मामले की जांच अभी जारी है।
जमानत के बाद फिर हुआ गिरफ्तार
हाकम सिंह को जुलाई 2022 में यूकेएसएसएससी स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। बाद में 5 सितंबर 2023 को उसे सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई।
हालांकि, सितंबर 2025 में प्रस्तावित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा से ठीक पहले एसटीएफ और देहरादून पुलिस ने उसे उसके साथी पंकज गौड़ के साथ दोबारा गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि दोनों छह अभ्यर्थियों से संपर्क में थे और चयन कराने के नाम पर 12 से 15 लाख रुपये लेने की तैयारी कर रहे थे। दोनों के खिलाफ उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
रसोइये से बना करोड़ों के नेटवर्क का सरगना
उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र निवासी हाकम सिंह का सफर एक प्रशासनिक अधिकारी के यहां रसोइये की नौकरी से शुरू हुआ। बाद में वह हरिद्वार में आपराधिक नेटवर्क के संपर्क में आया और उत्तर प्रदेश के नकल माफिया से जुड़ गया।
वर्ष 2008 में उसने पंचायत राजनीति में प्रवेश किया और 2019 में जिला पंचायत सदस्य बना। राजनीतिक प्रभाव, सरकारी ठेकों और प्रशासनिक संपर्कों के सहारे उसने अपना मजबूत नेटवर्क तैयार किया तथा सांकरी में आलीशान रिसॉर्ट सहित कई संपत्तियां खड़ी कर लीं।
जुलाई 2022 में पेपर लीक कांड का खुलासा होने के बाद एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद भाजपा ने उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया, गैंगस्टर एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज हुए और उसके रिसॉर्ट पर अतिक्रमण की कार्रवाई भी की गई।
अब ईडी द्वारा 63.30 लाख रुपये की संपत्तियों की कुर्की से स्पष्ट है कि जांच एजेंसियां भर्ती घोटाले से जुड़े आर्थिक नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं पर भी लगातार शिकंजा कस रही हैं। मामले में आगे और बड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।


