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माता जिया रानी महिला अध्ययन केंद्र में ‘मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण’ पर ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित, 20 अगस्त से शुरू होगा छह माह का प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम

नैनीताल। कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के माता जिया रानी महिला अध्ययन केंद्र की ओर से 7 अगस्त 2026 को “मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण: आत्म-जागरूकता से आत्म-सशक्तिकरण तक” विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, तनाव को समझने तथा आत्म-जागरूकता के माध्यम से आत्म-सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरित करना रहा।

कार्यक्रम में केंद्र की ओर से प्रोफेसर नीता बोरा शर्मा ने व्याख्यान की आवश्यकता और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करना किसी भी रूप में कमजोरी नहीं है, बल्कि यह जागरूकता और साहस की निशानी है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में विद्यार्थियों पर पढ़ाई, परीक्षा, करियर, प्रतियोगिता, भविष्य, परिवार और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अपने मन की भावनाओं को समझना, किसी विश्वसनीय व्यक्ति के साथ अपनी बात साझा करना और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सहायता लेना बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रोफेसर रश्मि पंत, मनोविज्ञान की प्रोफेसर एवं उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड शासन में सहायक निदेशक, रहीं। प्रो. पंत को 22 वर्षों से अधिक का शैक्षणिक अनुभव है। वह तीन पुस्तकों तथा 40 से अधिक शोध पत्रों की लेखिका हैं।

प्रोफेसर रश्मि पंत ने मानसिक स्वास्थ्य को व्यापक संदर्भ में समझाते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल किसी मानसिक बीमारी की अनुपस्थिति का नाम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के भावनात्मक संतुलन, आत्म-जागरूकता और जीवन की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि आत्म-जागरूकता व्यक्ति को अपनी भावनाओं, क्षमताओं और सीमाओं को समझने में मदद करती है, जिससे वह बेहतर निर्णय लेने और स्वयं को सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

उन्होंने युवाओं में मानसिक दबाव से जुड़े विभिन्न आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि 51 प्रतिशत मामले अकादमिक दबाव और 43 प्रतिशत मामले मूड स्विंग्स से जुड़े हैं। उन्होंने उत्तराखंड में मानसिक स्वास्थ्य सहायता की बढ़ती आवश्यकता पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, उत्तराखंड राज्य की टेली-मानस (Tele-MANAS) हेल्पलाइन पर शुरुआती आठ महीनों में लगभग 15 हजार कॉल प्राप्त हुए, जिनमें करीब 78 प्रतिशत कॉलर 18 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के थे। उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 35,700 बच्चे मानसिक अथवा विकासात्मक स्थितियों से प्रभावित हैं।

प्रो. पंत ने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, समय प्रबंधन, डिजिटल डिटॉक्स, डायरी लेखन और भारतीय ज्ञान परंपरा के अभ्यास को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को स्वयं को जानने, स्वीकार करने, विकसित करने और सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करना चाहिए। नियमित आत्म-चिंतन और स्वस्थ जीवनशैली को उन्होंने आत्म-देखभाल का महत्वपूर्ण आधार बताया।

कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर नीता बोरा ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि माता जिया रानी महिला अध्ययन केंद्र में जल्द ही ‘वेलबीइंग सेंटर’ (Wellbeing Centre) की स्थापना की जाएगी। उन्होंने बताया कि केंद्र की ओर से महिलाओं एवं सामुदायिक कल्याण को विशेष रूप से ध्यान में रखते हुए छह माह का प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम “Certificate Course in Mental Health Counselling with Special Reference to Women and Community Well-being” भी शुरू किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम का पहला बैच 20 अगस्त 2026 से प्रारंभ होगा।

ऑनलाइन आयोजित इस व्याख्यान में डी.एस.बी. परिसर के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापकों के साथ ही विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इनमें प्रोफेसर शुचिबिष्ट, प्रोफेसर ललित तिवारी, डॉ. नंदन बिष्ट, प्रोफेसर जया तिवारी, डॉ. हरदेश कुमार, डॉ. रुचि मित्तल, डॉ. भूमिका, राजकीय महाविद्यालय रानीखेत से डॉ. बृजेश जोशी, मुलायम सिंह यादव महाविद्यालय मैनपुरी से डॉ. जान मोहम्मद, सिक्किम से डॉ. धीरज, राष्ट्रीय शहीद सैनिक स्मारक विद्यापीठ की प्रधानाचार्या श्रीमती तारा बोरा, भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय से डॉ. नेहा जोशी, इलाहाबाद से डॉ. नीलिमा सिंह, डॉ. दीपिका, डॉ. नीलिमा गुप्ता, खुशबू, प्रीति सागर एवं फरहा बक्स सहित डी.एस.बी. परिसर के विभिन्न शोधार्थी, विद्यार्थी तथा महिला अध्ययन केंद्र के विद्यार्थी शामिल रहे।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अविनाश, राकेश कुमार एवं सचिन कुमार का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. किरण तिवारी ने किया।

उन्होंने व्याख्यान के अंत में सभी वक्ताओं, अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

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