चित्रशीला घाट में शनि मंदिर निर्माण को लेकर कुमाऊंनी समाज में आक्रोश, पहाड़ी आर्मी ने निकाली रैली

हल्द्वानी। रानीबाग स्थित प्राचीन एवं धार्मिक महत्व के चित्रशीला घाट में शनि मंदिर निर्माण को लेकर कुमाऊंनी समाज में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। रविवार को पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत के नेतृत्व में कुमाऊंनी समाज के लोगों और महिलाओं ने हिरानगर स्थित गोल्ज्यू मंदिर से सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय तक रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने चित्रशीला घाट की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ किए जाने पर आपत्ति जताई।

रैली में शामिल लोगों ने कहा कि चित्रशीला घाट कुमाऊं क्षेत्र का प्राचीन और पवित्र धार्मिक स्थल है। समाज के लोगों के अनुसार इस स्थान की धार्मिक मान्यता बेहद महत्वपूर्ण है और इसे भगवान शिव से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में भी देखा जाता है। ऐसे में स्थल की पुरानी धार्मिक परंपराओं और स्वरूप में बदलाव किए जाने से लोगों की आस्था प्रभावित हो सकती है।

प्रदर्शनकारियों ने चित्रशीला घाट में कथित तौर पर बनाए गए शनि मंदिर को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि घाट पर लंबे समय से जिस शिव स्थान की धार्मिक पहचान रही है, उसे यथावत रखा जाना चाहिए। कुमाऊंनी समाज ने मांग की कि यदि शनि मंदिर की स्थापना की जानी है तो इसके लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान का चयन किया जाए, ताकि चित्रशीला घाट की पारंपरिक धार्मिक पहचान और स्वरूप प्रभावित न हो।

रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी भी की। बड़ी संख्या में महिलाएं और कुमाऊंनी समाज के लोग इसमें शामिल हुए। रैली सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से मामले में हस्तक्षेप करते हुए चित्रशीला घाट की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने की मांग की गई।

समाज के लोगों ने कहा कि चित्रशीला घाट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कुमाऊं की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा स्थान है। इसलिए किसी भी नए निर्माण अथवा धार्मिक स्वरूप में बदलाव से पहले स्थानीय समाज की भावनाओं और परंपराओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

पहाड़ी आर्मी और कुमाऊंनी समाज ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने तथा घाट की पुरातन धार्मिक पहचान को बनाए रखने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी आपत्ति किसी धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे चित्रशीला घाट के पारंपरिक स्वरूप और शिव स्थान की पुरानी पहचान को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं।

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