हल्द्वानी। देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ ने प्रदेश सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है।
संघ का कहना है कि 18 जुलाई को विधानसभा में नगर विकास मंत्री की अध्यक्षता में सरकार और संगठन के बीच हुई वार्ता में सफाई कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन वार्ता के बाद अब तक सहमति से संबंधित कार्यवृत्त जारी नहीं किया गया है। इससे सफाई कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
हल्द्वानी में प्रेस वार्ता के दौरान संघ के प्रदेश संगठन मंत्री अमित कुमार ने सरकार पर सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। संगठन की ओर से पूर्व में धरना-प्रदर्शन, क्रमिक अनशन, अनशन और रैलियां तक की जा चुकी हैं।
अमित कुमार ने बताया कि लगातार आंदोलन के बाद 18 जुलाई को विधानसभा में नगर विकास मंत्री की अध्यक्षता में सरकार और सफाई कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई थी। संघ के अनुसार, वार्ता के दौरान कर्मचारियों की मांगों पर सहमति बनी और इसी भरोसे पर आंदोलन को स्थगित किया गया था। लेकिन वार्ता के कई दिन बीत जाने के बावजूद सहमति का कार्यवृत्त जारी नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि कार्यवृत्त जारी नहीं होने से कर्मचारियों को यह आशंका है कि सरकार उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। इससे सफाई कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। संघ ने सरकार से मांग की है कि वार्ता में बनी सहमति को जल्द लिखित रूप में जारी कर उस पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
एस्मा लगाए जाने का भी विरोध
प्रदेश संगठन मंत्री अमित कुमार ने सफाई कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान एस्मा लगाए जाने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान बातचीत और सहमति से होना चाहिए, न कि उनके आंदोलन को दबाने के लिए सख्त कानूनों का सहारा लिया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली के कारण सफाई कर्मचारी दोबारा आंदोलन की ओर बढ़ने को मजबूर हो रहे हैं। संघ ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो कर्मचारी एक बार फिर आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेंगे।
‘जरूरत पड़ी तो जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे’
अमित कुमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं। जरूरत पड़ी तो कर्मचारी जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन सरकार से टकराव नहीं चाहता, लेकिन कर्मचारियों के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
संघ ने प्रदेश सरकार से 18 जुलाई की वार्ता में बनी सहमति का कार्यवृत्त तत्काल जारी करने और उसमें तय मांगों पर कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश में सफाई कर्मचारियों का आंदोलन एक बार फिर जोर पकड़ सकता है।



