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“एमबीपीजी कॉलेज में एआई की पाठशाला, शोध और शिक्षा में तकनीक के प्रयोग पर हुआ मंथन”

डॉ. प्रमोद कुमार जोशी के प्रायोगिक सत्र ने जीता प्रतिभागियों का ध्यान, शोध और शिक्षा में एआई के उपयोग पर दिया जोर

हल्द्वानी। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (एमबीपीजी कॉलेज), हल्द्वानी में “Artificial Intelligence for Mathematical Research and Education” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला का आयोजन “AI Powered Innovation in Mathematical Research Education for Hilly Regions of Uttarakhand” शोध परियोजना के अंतर्गत किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधुनिक टूल्स से परिचित कराने के साथ ही गणितीय शोध एवं शिक्षा के क्षेत्र में इनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी देना रहा।

कार्यशाला के दूसरे दिन अम्रपाली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं हेड, आईटी सेल डॉ. प्रमोद कुमार जोशी ने प्रतिभागियों के लिए विशेष हैंड्स-ऑन एवं प्रायोगिक सत्र आयोजित किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न टूल्स, उनकी कार्यप्रणाली तथा अध्ययन, शिक्षण एवं शोध में उनके उपयोग की विस्तार से जानकारी दी। डॉ. जोशी ने जटिल तकनीकी विषयों को सरल उदाहरणों, प्रत्यक्ष प्रदर्शन और प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से समझाया, जिससे प्रतिभागियों को एआई टूल्स के वास्तविक उपयोग को समझने में आसानी हुई।

डॉ. जोशी के सत्र में प्रतिभागियों ने स्वयं विभिन्न एआई टूल्स का प्रयोग करते हुए उनकी उपयोगिता को समझा। सत्र के दौरान शोध सामग्री तैयार करने, विषय से संबंधित जानकारी जुटाने, विश्लेषण करने तथा शिक्षा एवं शोध प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में एआई की संभावनाओं पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने डॉ. जोशी के प्रायोगिक सत्र को विशेष रूप से उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।

प्रतिभागियों का कहना था कि कार्यशाला के दौरान प्राप्त व्यावहारिक जानकारी का उपयोग वे अपने अध्ययन, अध्यापन, शोध एवं अकादमिक गतिविधियों में सीधे कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई के विभिन्न टूल्स की जानकारी मिलने से शोध कार्य को अधिक व्यवस्थित, प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने में मदद मिलेगी।

कार्यशाला के दौरान एआई टूल्स, गणितीय शोध एवं शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग, हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण तथा शोधपरक अधिगम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को एआई के अवसरों के साथ-साथ इसके जिम्मेदार एवं नैतिक उपयोग से भी अवगत कराया।

शोध और उच्च शिक्षा में एआई की बढ़ती भूमिका पर जोर

समापन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. प्रमोद कुमार डोबरियाल, नोडल, मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना, उत्तराखंड तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. गोविंद पाठक, सहायक निदेशक, उच्च शिक्षा, उत्तराखंड उपस्थित रहे। वक्ताओं ने उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी से बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने कहा कि एआई आने वाले समय में शिक्षा और शोध की दिशा को व्यापक रूप से प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण तकनीकी माध्यम है। विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को इसका उपयोग केवल सुविधा के लिए नहीं, बल्कि रचनात्मक, जिम्मेदारीपूर्ण और शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से करना चाहिए। उन्होंने एआई के साथ मानवीय विवेक, मौलिकता और अकादमिक नैतिकता को बनाए रखने पर भी जोर दिया।

कार्यशाला के सफल आयोजन में महाविद्यालय के प्राचार्य एवं कार्यशाला संरक्षक डॉ. नरेंद्र सिंह बनकोटी, कार्यशाला संयोजक डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह, सह-संयोजक डॉ. कामिका चौधरी, डॉ. जे.एन. पंत, डॉ. दीपिका नेगी एवं डॉ. सुनीता जोशी सहित अन्य शिक्षकगण, रिसोर्स पर्सन और प्रतिभागियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने महाविद्यालय प्रशासन एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यशाला ने उन्हें एआई के नवीनतम टूल्स की जानकारी देने के साथ-साथ उनके प्रत्यक्ष एवं व्यावहारिक प्रयोग का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा उच्च शिक्षा एवं गणितीय शोध में नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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