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JCB और डंपरों के मालिक कौन? भीमताल विधानसभा क्षेत्र में कथित खनन गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर भी सवाल
रामगढ़। नैनीताल जिले के रामगढ़ क्षेत्र में दिनदहाड़े खनन किए जाने के आरोपों ने एक बार फिर क्षेत्र में चल रही कथित अवैध खनन गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और चर्चाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि संबंधित स्थान पर खनन की अनुमति नहीं है, तो खुलेआम JCB और डंपरों के जरिए यह काम किसके संरक्षण में किया जा रहा है?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि खनन गतिविधियां नियमों के विपरीत संचालित हो रही हैं, तो संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करनी चाहिए। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि आखिर इतनी बड़ी मशीनरी दिन के उजाले में खनन कार्य में लगी है तो क्या इसकी जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है?
JCB किसकी और डंपर किसके?
रामगढ़ क्षेत्र में कथित खनन को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। सबसे पहला सवाल खनन में इस्तेमाल की जा रही JCB और डंपरों के स्वामित्व को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मौके पर लगी JCB किसकी है और खनन सामग्री ढोने वाले डंपर किन लोगों के हैं।
यदि जांच में खनन अवैध पाया जाता है तो मशीनरी और वाहनों के मालिकों के साथ-साथ खनन स्थल, सामग्री के परिवहन और पूरे नेटवर्क की भी जांच की जानी चाहिए।
खनन प्रेमी’ को लेकर चर्चाएं, जांच की मांग
भीमताल विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से कथित खनन गतिविधियों को लेकर एक ऐसे प्रभावशाली व्यक्ति का नाम चर्चाओं में आने का दावा किया जाता रहा है, जिसे स्थानीय लोग कथित तौर पर ‘खनन प्रेमी’ तक कहते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति पर लगाए जा रहे ऐसे आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना जरूरी है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या रामगढ़ में सामने आए मामले का संबंध भी किसी संगठित खनन गतिविधि से है? यदि ऐसा है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि खनन के पीछे कौन लोग हैं, जमीन किसकी है, मशीनरी किसकी है और निकाली गई खनन सामग्री को कहां ले जाया जा रहा है।
संरक्षण का आरोप, जिम्मेदार विभागों पर निगाह
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि अवैध खनन वास्तव में हो रहा है तो बिना किसी संरक्षण या मिलीभगत के दिनदहाड़े इस तरह की गतिविधियां चलना मुश्किल है। हालांकि संरक्षण और मिलीभगत के इन आरोपों की भी जांच के बाद ही पुष्टि हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और खनन विभाग को केवल मौके पर पहुंचकर मशीनें हटाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे मामले की तह तक जाना चाहिए। यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि संबंधित क्षेत्र में पहले भी खनन हुआ है या नहीं और यदि हुआ है तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रामगढ़ में खनन गतिविधियों की मौके पर जांच कराई जाए, खनन की अनुमति और दस्तावेजों की जांच की जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच में क्या सामने आता है। फिलहाल रामगढ़ में दिनदहाड़े कथित खनन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—JCB किसकी है? डंपर किसके हैं? खनन की अनुमति है या नहीं? और यदि यह अवैध है तो आखिर इतनी बेखौफ होकर गतिविधियां किसके भरोसे चल रही हैं?

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