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नेपाल में नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट ग्लेशियर ढहने के बाद आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

शुक्रवार तक नेपाल में मरने वालों की संख्या 552 पहुंच गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। अलग-अलग एजेंसियों और राहत कार्यों से जुड़े आंकड़ों के अनुसार लापता लोगों की संख्या करीब एक हजार से लेकर 1500 से अधिक बताई जा रही है।

इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। मंत्रालय के अनुसार, करीब 320 भारतीय नागरिकों के संबंध में अब भी जानकारी जुटाई जा रही है, जबकि लगभग 400 भारतीय नागरिक चीन की ओर सुरक्षित बताए गए हैं। भारत सरकार नेपाल और चीन के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में रहकर भारतीय नागरिकों की स्थिति का पता लगाने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में जुटी हुई है।

नेपाल पुलिस के अनुसार, आपदा प्रभावित आठ जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक चितवन जिले से 178 शव मिले हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व से 110, गोरखा से 44, नुवाकोट से 37 और धादिंग से 33 शव बरामद किए गए हैं। वहीं, तनाहू से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा जिले से 12 शव मिलने की पुष्टि की गई है।

तीसरे दिन भी जारी है बड़े स्तर पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन

भीषण तबाही के तीसरे दिन भी नेपाल में खोज एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। प्रभावित इलाकों में फंसे और घायल लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों से 1,545 घायल और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें से 84 लोगों का काठमांडू के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। वहीं अन्य रिपोर्टों में बताया गया है कि अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए एयरलिफ्ट किया गया है।

राहत और बचाव अभियान में हजारों सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं। नेपाल सेना के जवानों के साथ पुलिस और आपदा राहत दल मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई इलाकों में सड़क और पुल बह जाने के कारण राहत टीमों को प्रभावित गांवों तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्लेशियर ढहने के बाद आया पानी, कीचड़ और मलबे का सैलाब

बताया जा रहा है कि बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट एक ग्लेशियर के ढहने के बाद भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा तेजी से नीचे की ओर आ गया। इसके बाद पानी, कीचड़ और मलबे का विशाल सैलाब मध्य नेपाल के कई इलाकों से गुजरता हुआ नीचे की ओर बह निकला।

अचानक आए इस सैलाब ने रास्ते में पड़ने वाले कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचा दी। कई मकान, वाहन, सड़कें और पुल पानी के तेज बहाव में बह गए। कई परिवारों के घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।

आपदा का असर केवल आबादी वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है। नेपाल के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में संचार एवं सड़क संपर्क टूटने के कारण नुकसान का वास्तविक आकलन अभी पूरी तरह नहीं हो पाया है।

लापता लोगों की तलाश में सेना का अभियान तेज

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन तंत्र और सुरक्षा एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन कर रही हैं। मलबे में दबे और लापता लोगों की तलाश के लिए सेना के जवान आधुनिक उपकरणों और हेलीकॉप्टरों की मदद ले रहे हैं।

कई क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रशासन को आशंका है कि जैसे-जैसे मलबे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान आगे बढ़ेगा, मृतकों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।

नेपाल में आई इस भयावह प्राकृतिक आपदा ने पूरे क्षेत्र में दहशत और शोक का माहौल पैदा कर दिया है। राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब भी लापता लोगों का पता लगाना, दूरदराज के इलाकों तक सहायता पहुंचाना और बेघर हुए हजारों लोगों के लिए भोजन, चिकित्सा और अस्थायी आवास की व्यवस्था करना है।

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