देवीधुरा की ऐतिहासिक बग्वाल में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने की शिरकत, लोक संस्कृति और आस्था के अद्भुत संगम के बने साक्षी
देवीधुरा। मां वाराही धाम, देवीधुरा में आयोजित ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध बग्वाल उत्सव में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने असंख्य श्रद्धालुओं के साथ प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने मां वाराही देवी के दर्शन कर प्रदेशवासियों तथा भीमताल विधानसभा क्षेत्र के लोगों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मां वाराही धाम में आयोजित बग्वाल उत्सव उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं का अनूठा संगम माना जाता है। उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीय लोग शामिल हुए। पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर नजर आया।
कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने कहा कि देवीधुरा की ऐतिहासिक बग्वाल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की गौरवशाली लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि चार खामों—वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया—के रणबांकुरों द्वारा पारंपरिक रूप से खेले जाने वाली बग्वाल उत्तराखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है। इस ऐतिहासिक परंपरा में आस्था, साहस, भाईचारा और लोक संस्कृति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
मंत्री कैड़ा ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की लोक परंपराएं हमारी अमूल्य धरोहर हैं और इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने के साथ ही उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर उन्होंने मां वाराही देवी से समस्त प्रदेशवासियों एवं भीमताल विधानसभा क्षेत्रवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि मां वाराही देवी की कृपा सभी लोगों पर बनी रहे और प्रदेश निरंतर विकास एवं समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ता रहे।
ऐतिहासिक बग्वाल के अवसर पर देवीधुरा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति से जुड़े इस आयोजन ने एक बार फिर उत्तराखंड की गौरवशाली परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की भव्य झलक प्रस्तुत की।










