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देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य विधानसभा में मंगलवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किया। इसमें बहुविवाह और ‘हलाला’ जैसी प्रथाओं को आपराधिक कृत्य बनाने तथा ‘लिव-इन’ में रहने वाले जोड़ों के लिए अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान है।

विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन पेश ‘समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड-2024’ विधेयक में धर्म और समुदाय से परे सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति जैसे विषयों पर एक समान कानून प्रस्तावित है। हालांकि, इसके दायरे से प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा गया है।

विधेयक पेश किये जाने के दौरान सत्तापक्ष के विधायकों ने मेजें थपथपाकर उसका स्वागत किया और ‘भारत माता की जय, वंदे मातरम, जय श्रीराम’ के नारे लगाये। इससे पहले, विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते हुए विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों ने आरोप लगाया कि इस विधेयक को सरकार जल्दबाजी में पारित करना चाहती है।

इसका अध्ययन करने और उस पर चर्चा के लिए समय नहीं दिया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि सरकार इस विधेयक को बिना चर्चा के जल्दबाजी में पारित कराना चाहती है।’

इस पर विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी ने विपक्षी सदस्यों को आश्वासन दिया कि विधेयक पर चर्चा के लिए उन्हें पर्याप्त समय दिया जाएगा।

ये हैं प्रमुख प्रावधान

विधेयक में बहुविवाह पर रोक लगाई गयी है। एक पति या पत्नी के जीवित रहते कोई नागरिक दूसरा विवाह नहीं कर सकता।

असाधारण कष्ट की स्थिति को छोड़कर न्यायालय में तलाक की अर्जी विवाह का एक साल पूरा होने से पहले नहीं दी जा सकेगी।

मुस्लिम समुदाय में तलाकशुदा पत्नी के लिए प्रचलित ‘हलाला’ को प्रतिबंधित करने के साथ ही उसे आपराधिक कृत्य घोषित करते हुए दंड का प्रावधान किया गया है।

लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। एक माह में सूचना न देने या गलत सूचना देने पर सजा हो सकती है।

लिव-इन जोड़े के बच्चे को विवाह से पैदा बच्चे के समान ही उत्तराधिकार का हक मिलेगा। महिला को अगर पुरुष साथी छोड़ देता है तो उससे भरण-पोषण का दावा कर सकती है।

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