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कुमाऊ के 6 ज़िलों में आग लगने से 8 करोड़ 99,740 का हुआ नुकसान 

रिपोर्टर – गुड्डू सिंह ठठोला 

नैनीताल। ऊत्तराखण्ड में कुमाऊं के जंगल जगह जगह धधक रहे हैं जिसमें नैनीताल और पिथौरागढ़ प्रमुख हैं।

कुमाऊं के छह जिलों में शुक्रवार शाम तक कुल 337 घटनाएं नोट हुई हैं, जिसमें 430.65 हैक्टेयर भूमि में आग लगी है और इससे जंगलों को ₹8,99,740 का नुकसान हुआ है।

       मुख्य वन संरक्षक के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 14 डिवीजन में कई जगह आग लगी हुई है। पूरे कुमाऊं क्षेत्र की अगर बात करें तो शुक्रवार शाम तक कुल 337 घटनाएं दर्ज की गई।

इसमें वन क्षेत्र के 430.65 हैक्टेयर भूमि में आग लगी है। इस आग से जंगलों को ₹8,99,740/= रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें मुख्यतः नैनीताल जिले में 

96 घटनाएं हुई और इससे 112.56 हैक्टेयर भूमि जल गई जिससे कुल ₹1,93,730/= का नुकसान हुआ है।

इसके बाद पिथौरागढ़ जिले में 76 घटनाएं दर्ज हुई हैं और इसमें 114.25 हैक्टेयर भूमि जली जबकि इससे ₹2,84,750/= का नुकसान हुआ।

अल्मोड़ा के दो डिवीजन में 47 घटनाओं में 77.60 हैक्टेयर भूमि जली और इससे 2,08,800/= का नुकसान हुआ है।

चंपावत में 36 घटनाएं हुई और इससे 35.14 हैक्टेयर भूमि नष्ट हो गई, जबकि आग से ₹77,140 का नुकसान हुआ है। बागेश्वर में 12 घटनाएं दर्ज हुई हैं जिसमें 10.26 हैक्टेयर भूमि में आग लगी और ₹29,580/= का नुकसान हुआ। 

यू.एस.नगर के तराई केंद्रीय क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा नैनीताल जिले में आता है इसलिए वहां हुई 2 घटनाओं में 0.27हैक्टेयर भूमि जली है और इससे केवल ₹270/= का नुकसान हुआ है। 

      आग के मामले में अति संवेदनशील नैनीताल वन प्रभाग में 28 केस दर्ज हुए हैं जो लगभग 33.15 हैक्टेयर भूमि कवर करता है। आग से लगभग ₹96,450/= की श्रति हुई है इसमें कोई जनहानि नहीं हुई।

इस जिले में आग बुझाने के कार्य में सब मिलाकर 576 कर्मचारी जुटे हुए हैं। माना जाता है कि असावधानीवश आबादी क्षेत्र से आग जंगलों की तरफ फैलती है। ये आग चीड़ के जंगलों में अधिक मात्रा में है। 

      आज सवेरे से ही एम.आई.17 ने भीमताल झील से बकेट में पानी भरा और पाइंस और लडियाकांटा के जंगल में बौछार कर आग बुझाने का काम किया।

डी.एफ.ओ.चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि उनकी टीमें हर आग वाले स्थल में मौजूद हैं और उसे बुझाने में जुटे हैं।

उन्होंने पाइंस और लाडियाकांटा के जंगल में 30 लोग लगाकर आग पर काबू पाया। इसके साथ ही एरीज, बारहपत्थर, बल्दीयाखान आदि क्षेत्रों में आग बुझाकर बची हुई आग पर भी नियंत्रण किया जा रहा है।

कहा कि अब ‘मौपिंग अप’ एक्सरसाइज चल रही है जिससे दोबारा लगने वाली आग और धुएं पर नजर रखकर नियंत्रण किया जा रहा है।

उन्होंने ये भी कहा कि अब जो काम एयरफोर्स और प्रशासन कर रहा है, उसमें वो सहयोग कर रहे हैं। सरकार ने उस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए खुद हैलीकॉप्टर भिजवाया और ये मिशन शुरू हुआ।

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