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बद्रीनाथ धाम के पुरोहित समाज ने पास के जरिए वीआईपी दर्शन की व्यवस्था बंद करने की मांग की। साथ ही पुरोहित समाज ने मंदिर के दूसरी तरफ से आने जाने के परंपरागत रास्तों पर लगी बैरिकेडिंग हटाने की मांग की।

पुरोहित समाज और स्थानीय लोगों ने मंदिर में पहले की तरह प्रवेश करने समेत आधा दर्जन से अधिक मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के फैसले से उन्हें भक्तों के लिए पूजा पाठ करना मुश्किल हो गया है।

बता दें बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति यानी बीकेटीसी ने वीआईपी दर्शन की शुरुआत की है। इसके लिए वह बद्रीनाथ में हर वीआईपी श्रद्धालु से 300 रुपये का शुल्क ले रही है। पुरोहित समाज और स्थानीय लोगों ने बीकेटीसी के उक्त फैसलों के खिलाफ साकेत चौक और बदरीनाथ धाम में सोमवार को सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक धरना प्रदर्शन किया। स्थानीय व्यापारियों ने बीकेटीसी के फैसलों के खिलाफ अपनी दुकानें भी बंद रखी।

पुरोहित समाज ने मांग की कि मंदिर के पुजारी समुदाय के बामनी गांव का रास्ता खोला जाना चाहिए। वीआईपी दर्शन सिस्टम को बंद किया जाना चाहिए क्योंकि जिन द्वारों से वीआईपी तीर्थयात्रियों को अनुमति दी जा रही है, उन्हें मंदिर के पुजारियों के लिए बंद कर दिया गया है। इससे उन्हें मंदिर में प्रवेश करने में कठिनाई हो रही है। विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलने पर एसडीएम बद्रीनाथ सीएस वशिष्ठ धरना स्थल पर पहुंचे और पुजारी समुदाय के सदस्यों को समझाने की कोशिश की।

पुजारी समूह ने कहा कि तीर्थयात्रियों को टोकन प्रणाली में आवंटित समय स्लॉट के अनुसार दर्शन की अनुमति दी जानी चाहिए। बद्रीनाथ तीर्थ पुरोहित समाज बद्रीनाथ के कार्यकारी सदस्य विजय ध्यानी ने कहा कि प्रशासन और बीकेटीसी की ओर से वीआईपी दर्शन की व्यवस्था लागू किए जाने के बाद से प्रशासन ने पुजारियों के लिए द्वार बंद कर दिए हैं। इसकी वजह से मंदिर के पुजारी हिंदू परंपराओं के अनुसार पूजा पाठ करने के लिए मंदिर में प्रवेश करने में असमर्थ हैं।

समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन और मंदिर समिति के पदाधिकारियों से आंदोलनकारियों की बातचीत के बाद बामणी गांव को जाने वाले रास्ते से अवरोध हटा दिए गए हैं। जोशीमठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि आंदोलकारियों की अन्य मांगों से शीर्ष अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

मंदिर समिति के उपाध्यक्ष किशोर पंवार ने कहा कि राज्य सरकार के निर्देश पर अभी तक वीआईपी दर्शन की व्यवस्था शुरू ही नहीं की गई है। उत्तराखंड सरकार ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर उनसे शुरुआती 15 दिनों में वीआईपी लोगों के चारधाम दर्शन के लिए नहीं आने का अनुरोध किया है।

बदरीनाथ तीर्थ पुरोहित संगठन से जुड़े परवीन ध्यानी ने आरोप लगाया कि महायोजना के नाम पर तोड़-फोड़ में पुरोहित समाज के एक दर्जन से अधिक लोगों के घर टूट गए हैं। उन्होंने कहा कि वीआईपी दर्शन के नाम पर अव्यवस्था फैलाई गई।

स्थानीय लोगों के घरों को जाने वाले मुख्य पैदल मार्ग को ही बंद कर दिया गया। परवीन ध्यानी ने कहा कि आंदोलन के बाद प्रशासन ने पैदल रास्तों से बैरिकेडिंग हटा दी है। वीआईपी दर्शन के लिए बना काउंटर भी बंद कर दिया है। इसके बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया है।

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