नैनीताल में हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा के असली गुनाहगार कौन को लेकर बैठक आयोजित की गई
रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला
नैनीताल। कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा के असली गुनाहगार कौन? इस बात को लेकर कौमी एकता मंच के प्रतिनिधियों ने नैनीताल में पत्रकार वार्ता की।
वार्ता में कौमी एकता मंच के गठन के बारे में बताया गया कि 8 फरवरी को हल्द्वानी शहर के बनभूलपुरा क्षेत्र में हुई हिंसा की अप्रिय घटना के बाद विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने 25 फरवरी 2024 को मंच का गठन किया।
हिंसा के कारणों को जानने के लिए फैक्ट फाइंडिंग, मेहनतकश पीडितों को राशन, मेडिकल सहायता तथा सम्भव कानूनी सहायता करने का लक्ष्य रखा। फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में मंच के सदस्यों ने कहा कि 28 फरवरी से 5 मार्च के बीच बनभूलपुरा हिंसा पर क्षेत्र का सघन दौरा और विभिन्न अखबारों की रिपोर्टों के हवाले से अपनी रिपोर्ट तैयार की है।
फैक्ट फाइंडिंग में पाया गया कि प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही और राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित मुस्लिम अल्पसंख्यक विरोधी माहौल के चलते हो रही घटनाओं की कड़ी में बनभूलपुरा हिंसा की घटना हुई।
रजनी जोशी ने कहा कि वनभूलपुरा हिंसा में कितने लोग घायल हुए, कितनो को चोटें लगी उसमें कितनी महिलाएं, बच्चे थे इसका दोषी कौन है। साथ ही जो 7 लोग मारे गए उनकी एभी तक FIR तक नही हुई है। जो मारे गए है उनके दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते है। उन्होंने कहा कि घायलो को 5 लाख व मारे गए लोगो के परिजनों को 25 लाख मुआवजे के तौर पर दिए जाएं।
यह प्रशासन की कार्यवाही के दोहरेपन को जाहिर कर देता है। घटना के बाद राज्य के मुख्यमंत्री, क्षेत्र के सांसद आते हैं घायल पुलिस कर्मियों,मीडिया कर्मियों तथा निगम कर्मियों से मिलते हैं।
संवेदना व मुआवजे की घोषणा करते हैं लेकिन बनभूलपुरा हिंसा के मृतकों व पीडितों व आमजनों के लिए कोई संवेदना तक जताना जरूरी नहीं समझते यह व्यवहार न्याय और सत्य का नहीं बल्कि पक्षपात और द्वेष का है।
बैठक में शामिल थे। डॉ उमा भट्ट, बसंती पाठक, रजनी जोशी, हीरा जंगपांगी, प्रेम प्रसाद आर्या, डॉ कैलाश पांडे, के के बोरा, महेश, चंदन सिंह, रोहित आदि लोग मौजूद थे।














