“तेहि बननिकट दसानन गयऊ। तब मारीच कपटमृग भयऊ॥”
रिपोर्टर – अजय वर्मा
हल्द्वानी। प्राचीन श्री रामलीला मैदान में आज दिनांक 7 अक्टूबर 2024 को दिन की लीला में सूर्पनखा रावण संवाद, मारीच रावण संवाद, सीता हरण, जटायु उद्धार तथा सीता खोज की लीला का सुंदर प्रदर्शन किया गया।
जबकि रात्रि लीला में राज्याभिषेक घोषणा, दशरथ कैकई संवाद, राम वनागमान, केवट संवाद का मंचन श्री राधा रसिक बिहारी लीला संस्थान वृंदावन के व्यास जानकी दास द्वारा किया गया।
लक्ष्मण के हाथों कटी हुई नाक लेकर सूर्पनखा लंकाधिपति रावण के पास पहुंचती है और पूरा प्रकरण रावण को सुनाती है।
जिस पर रावण क्रोधित होकर अपने मामा मरीज से कहता है कि आप स्वर्ण हिरण का रूप धारण करके पंचवटी के आसपास विचरण कीजिए।
मारीच सोने के हिरण का रूप बनाकर पंचवटी के सामने से निकलता है, जिसे देखकर माता सीता बहुत हर्षित होती हैं।

और भगवान श्री राम से कहती हैं मुझको यह स्वर्ण हिरण चाहिए माता सीता की इच्छा को जानकर भगवान राम स्वर्ण हिरण रूपी मारीच के पीछे-पीछे जंगल में चले जाते हैं और जब उसको भगवान राम का तीर लगता है तो वह जोर से चिल्लाता है।
हाय लक्ष्मण हाय लक्ष्मण। माता सीता जब यह सुनती हैं तो उनको लगता है कि भगवान श्री राम पर कोई विपत्ति आई है, और वह लक्ष्मण जी से भगवान राम के पीछे जाने के लिए जिद करती हैं ।
माता सीता की जिद को देखकर लक्ष्मण जी पंचवटी में कुटिया के चारों तरफ लक्ष्मण रेखा खींच देते हैं और कहते हैं कि आप किसी भी कीमत पर इस लक्ष्मण रेखा को मत पार करना और भगवान राम की आवाज जिस दिशा से आती है उधर श्री लक्ष्मण जी चल देते हैं।
कुछ देर बाद रावण ब्राह्मण का रूप करके वहां पर भिक्षा मांगने कुटिया के समक्ष आता है और लक्ष्मण रेखा को देखकर चालाक रावण सीता जी से उस रेखा से बाहर आकर भिक्षा देने के लिए कहता है जैसे ही सीता जी लक्ष्मण रेखा को पार करती हैं।
रावण माता सीता का हरण करके ले जाता है। रास्ते में गिद्धराज जटायु जब यह देखते हैं कि माता सीता को दुष्ट रावण हर के ले जा रहा है तो वे सीता जी को छुड़ाने के लिए रावण पर हमला कर देते हैं।
एक पल के लिए रावण उनके हमले से मूर्छित हो जाता है लेकिन तुरंत ही मूर्छा से उठने के बाद वह गिद्धराज जटायु के पर काट देता है और मरणासन्न स्थिति में छोड़कर सीता जी को लेकर लंका चला जाता है ।
माता सीता जी की खोज करते हुए जब भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी जंगल में जटायु जी के पास पहुंचते हैं तो जटायु द्वारा यह बताया जाता है कि माता सीता को हरण करके रावण लंका लेकर गया है और उसके बाद जटायु जी राम जी की गोद में अपना शरीर छोड़ कर परमगति को प्राप्त होते हैं।
भगवान श्री राम जटायु जी का अंतिम संस्कार अपने हाथों से करके सद्गति प्रदान करते हैं और सीता माता की खोज को आगे की तरह बढ़ जाते हैं।
आज की लीला में संचालन समिति से एन बी गुणवंत, साकेत अग्रवाल, प्रेम गुप्ता, भवानी शंकर नीरज, राजेंद्र अग्रवाल, अरुण अग्रवाल आदि ने गणमान्य नागरिकों का अभिनंदन किया।
रामलीला मैदान में शेखर गर्ग ने फोटोग्राफी तथा संजय गोयल, वासु बिष्ट, तुषार सोनकर, सचिन आदि ने व्यवस्था सेवा दी।
मुख्य अतिथि सुरेश अग्रवाल, आलोक शारदा, सौम्या अग्रवाल अग्रवाल सभा अध्यक्ष नीरज प्रभात गर्ग, मनोज अग्रवाल, अमित अग्रवाल ,अनिल अग्रवाल, देवेश अग्रवाल सिस्टर मैथ्यू , कृष्ण चंद्र बेलवाल, आनंद भाकुनी आदि रहे।





