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प्रदेश आज 24 वर्ष का हो गया है प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र की जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को विवश 

पर्वतीय क्षेत्र के सड़क हादसे प्रदेश के नेताओं की पोल खोल रहे हैं जनता से झूठे वादे चुनावी मंचों से की गयी घोषणाएँ केवल वोट हांसिल करने तक मात्र रह गयी हैं।

उत्तराखंड में चाहे शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था और सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का आज भी अभाव है।

ओखलकांडा ब्लॉक के डाल कन्या गांव में कांग्रेस शासन में 22 बेड का बना अस्पताल सरकार और स्थानीय विधायक की अनदेखी के कारण खंडहर में तब्दील हो चुका है।

पूर्व दर्जा राज्यमत्री हरीश पनेरू ने स्थानीय विधायक पर चुनाव जीतकर हल्द्वानी में मौज करने का और क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि अस्पताल की देखभाल व रखराव व डॉक्टर की व्यवस्था के लिए कई बार प्रशासन को अवगत कराया लेकिन प्रशासन भी शिक्षा और स्वास्थ्य की ओर ध्यान नहीं दे रहा है ।

जिससे क्षेत्र की जनता अपने आपको स्थानीय विधायक व सांसद को वोट देकर ठगा महसूस कर रही हैं।

पहाड़ों के अधिकतर विद्यालय शिक्षक विहीन हो गए हैं। कई विद्यालय एकल शिक्षक के सहारे चल रहे हैं जिससे बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा का गृह क्षेत्र का हाई स्कूल एकल शिक्षक व शिक्षामित्र के सहारे चल रहा है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।

ऐसा ही हाल कुमाऊं और गढ़वाल के अधिकतर पहाड़ी क्षेत्र के स्कूलों का है। मंत्री व विधायक अपने गृह क्षेत्र में ही शिक्षा स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत  सुविधाओं को देने में असहाय नजर आ रहे हैं।

वही चाहे कुमाऊँ मंडल हो या गढ़वाल मंडल आए दिन गर्भवती महिलाओं को   स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।

पहाड़ की पीड़ा : गर्भवती को डंडों के सहारे सड़क तक ला रही थीं महिलाएं, रास्ते में हुआ प्रसव

विधायक-मंत्री से लेकर अधिकारी तक आए दिन प्रदेश के विकास के बड़े-बड़े दावे करते रहते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में आज भी लोग सड़क जैसी मूलभूत सुविधा को तरस रहे हैं।

इसका ताजा उदाहरण टिहरी जिले के नरेंद्रनगर ब्लाक की दोगी पट्टी में बुधवार को तब देखने को मिला, जब एक गर्भवती को अस्पताल पहुंचाने के लिए गांव की अन्य महिलाएं डंडी से दस किमी दूर सड़क तक ले जा रही थीं और इसी बीच मार्ग में ही उसका प्रसव हो गया।

विधानसभा भीमताल की दो दर्जन से अधिक ग्राम सभाओं को जोड़ने वाला तीन दशक से अधूरा व कच्चा पोखरी-कुलोरि-नगौनिया-देवलीधार- सुरंग मोटर मार्ग नेताओं की अनदेखी के भैंट चढ़ा है।

वही अधोडा अमजड मीडार मोटर मार्ग  बदहाल स्थिति में है। लोग जानजखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर है।

इस सड़क पर दर्जनों लोग जान गवा चुके हैं फिर  भी स्थानीय विधायक सांसद व प्रशासन के कानों मे जू नहीं रेंग रहा है।

क्षेत्रीय विधायक के दूसरे कार्यकाल का तीसरा वर्ष चल रहा है मगर उन्होंने भी अपने विकासखंड की जनता की पीड़ा को नहीं समझा।

जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री पर्वतीय क्षेत्र की बदहाल सड़कों के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों को सस्पेंड कर रहे हैं।

वहीं इन पर्वतीय क्षेत्र की जनता प्रदेश के मुखिया से सवाल करना चाहती है कि क्या आप अपने उन नेताओं पर भी कोई कार्यवाही करेंगे, जो जनता के सम्मुख वोट हासिल करने हेतु सिर्फ़ कोरी घोषणाएँ करते हैं उसके बाद जनता की सुध तक नहीं ली जाती ?
विधानसभा चुनाव 2022 से पूर्व ही उक्त रोड के डामरीकरण एवं आगे मिलान हेतु स्वयं मुख्यमंत्री खनस्यू तहसील के प्रांगण से घोषणा कर चुके हैं ।

उसके पश्चात क्षेत्रीय सांसद व विधायक यहीं से लोकसभा चुनाव 2024 की चुनावी सभा में उक्त रोड के डामरीकरण व मिलान की घोषणा कर चुके हैं।

परंतु अब प्रदेश के मुखिया से लेकर सांसद, विधायक अपने ही वादे भूल गए हैं।

कच्ची सड़कों से कोई अनहोनी ना हो समय रहते नेताओं को अपनी जिम्मेदारी को पूरा करना होगा तभी इन पर्वतीय क्षेत्र की जनता को प्रदेश की सरकार पर विश्वास क़ायम रहेगा।

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