बिंदुखत्ता/नैनीताल। उत्तराखंड के युवा कवि गोकुलानंद जोशी ने अपने 22वें जन्मदिन के विशेष अवसर पर पहाड़ों में बढ़ती बेरोज़गारी, पलायन और उजड़ती संस्कृति को लेकर एक मार्मिक कविता “बेरोजगार हम – पहाड़ की पुकार” की रचना की है। इस कविता के माध्यम से कवि ने पहाड़ी युवाओं की पीड़ा, खाली होते गाँव, बंजर होते खेत और रोजगार के अभाव को प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया है।

कवि का कहना है कि यह रचना उनके जीवन के 22वें वर्ष की नई शुरुआत का प्रतीक है, जिसमें वे अपने पहाड़, अपनी संस्कृति और पहाड़ के युवाओं के भविष्य के लिए आवाज़ उठाना चाहते हैं। यह कविता आज के समय में उत्तराखंड के पहाड़ों की सच्ची तस्वीर सामने रखती है।

पूरी कविता इस प्रकार है—

बेरोजगार हम – पहाड़ की पुकार

बेरोज़गार हर हमर य पहाड़,
खाली पड़ री हमर य घर-द्वार।
जवानी में देश–प्रदेश छै,
बुढ़ि काव पहाड़ पना ए गै।

कसि कांटों आपढ़ य दिन-रात,
खाडु खाड नै पीणु पणी नैं।
गौं-घर में सब ताई लागी गेंद,
गाड़-भिड़ सब बंजर पड़ गै।

पैली गयूँ – धान हुछी,
जब सै भरा आ।
तब सै सारी गौँ की हरियाली
दुर भगै।
ना नौकरी, ना रोजगार,
कसि पालूं आपण परिवार?

पढ़न-लिखन सब छू बेकार,
के करूं, कसि पड़ूं
आपण नातिन–आचकलाक जबान में?

सरकार लै नी सुणन चानैय,
हमेरी दुखेकी य आवाज़।
कसि याक बाणी, कसि याक माटी?
खाली रबेर या पेट नी भरीन।

मन में दुख, आंख में आंसु छन,
भविष्य कूं अंधकार में छू हमर।
कसि बचूं य पहाड़
और य आपड़ संस्कृति?

जब जवान हाथ–खूट ख़ाली घूमणी,
हें भगवान! कभे तो सुणो।
सुणो हमेरी य पुकार,
हमर पहाड़ फेर आबाद है जाओ,
युवा कूं रोजगार मिलि जाओ।
हमारे पहाड़ फेर हरी-भरी है जाओ।

 कवि: गोकुलानंद जोशी (उत्तराखंड)
स्थाई पता: करासमाफ़ी, काफलीगैर, जिला – बागेश्वर, उत्तराखंड
वर्तमान पता: पश्चिमी राजीव नगर, घोड़ानाला, बिंदुखत्ता,
जिला – नैनीताल, उत्तराखंड

Advertisement
यह भी पढ़ें :  आपका राशिफल : 15 अक्टूबर 2026

You missed

❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.