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राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु ने भाजपा सरकार पर बाहर से  बाघों को लाकर  पहाड़ के जंगल में छोड़ने का लगाया आरोप 

लाठी वह डंडों से जंगली जानवरों का सामना करते वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारी, संसाधनों का अभाव

आखिर वन विभाग के कर्मचारी बिना सुरक्षा उपकरणों के कब तक करते रहेंगे जंगली जानवरों से समना

आखिर कब तक पहाड़ की महिलाएं  बनेगी जंगली जानवरों का निवाला 

उत्तराखंड में आए दिन जंगली जानवर पहाड़ मे लोगों पर कर रहे हैं हमला

बन बिना सुरक्षा उपकरणों के वन-विभाग के कर्मचारी 

भीमताल। पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री एवं प्रमुख राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु ने कल किटोडा चमोली ओखलकाण्डा में बाघ का शिकार बनी महिला का शव घटना स्थल से कुछ दूर लाकर ग्रामीण जनता के साथ चार घंटे तक धरना प्रदर्शन किया।

ग्रामीण क्षेत्र की जनता ने मांग रखी कि बाघ को तत्काल मारने के आदेश जारी किया जाय क्षेत्र की सम्बन्धित सड़कों को ठीक करने के आदेश जारी किया जाय।

बाघ प्रभावित क्षेत्रों में सौर ऊर्जा लाइटें लगाई जाय, मृतक परिवार के एक नौकरी दी जाय, सफेद कुरी झाड़ियों को पूरा साफ किया जाय।

धटना स्थल पर ग्रामीण जनता ने क्षेत्रीय विधायक एवं वन अधिकारियों को खूब खरी खोटी सुनाई तथा विधायक की नहीं सुनी बल्कि उन्हें भी जनता के आक्रोश का कई बार सामना करना पड़ा तथा मजबूर हो जनता के साथ खडा रहना पड़ा ।

तमाम जिम्मेदार अधिकारियों ने रात दस बजे मांग पूरी करने का लिखित पत्र सौंपा तब जाकर मौके पर शव उठाकर घर की ओर ले गये।

पनेरू ने कहा है कि वन विभाग एवं विधायक एक ही विधान सभा में दोहरा मापदण्ड अपना रहे हैं, दीनी तल्ली में बाघ को मारने आदेश नहीं दिया गया।

जानवरों के चारे की व्यवस्था नहीं की गई, दिये गये आर्थिक मदद में भिन्नता है।

  भाजपा सरकार ने बाहर से  बाघों को लाकर  पहाड़ के जंगल में छोड़ दिया तथा पहाड़ की महिलाओं की मेहनत को अनदेखा कर रहे हैं उन्हें पहाड़ के लोगों की कोई चिंता नहीं है।

इसको लेकर शीघ्र एक बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा । जिसमें उत्तराखंड सरकार , जिला प्रशासन, सांसद एवं विधायक को जवाब देना पड़ेगा कि आखिर पिछले 5 सालों में इतनी घठनायें कैसे हो रही हैं तथा इतनी बाघों की निवाला बनाने की घटनाएं क्यों हो रही है।

इससे साफ होता है कि सरकार ने चिड़ियाघरों में रखे बाघों को भी पहाड़ी क्षेत्र के जंगल में छोड़ दिया है ।

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