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देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद अब उस कथित ‘वीआईपी’ के नाम से पर्दा उठने की उम्मीद जगी है, जिसे लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

वीआईपी को लेकर मचे राजनीतिक और सामाजिक घमासान तथा अभिनेत्री उर्मिला सनावर की ओर से जारी कथित ऑडियो क्लिप के बाद सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है। बीते चार महीनों में यह तीसरा मामला है, जिसे जनदबाव के चलते सीबीआई को सौंपा गया है।

पिछले चार महीने में तीसरा केस सीबीआई के हवाले

उत्तराखंड में पहले से ही कई मामलों की जांच सीबीआई कर रही है। वर्ष 2026 में यह पहला मामला है, जिसे सीबीआई जांच के लिए संस्तुति दी गई है। इससे पहले:

सितंबर 2025 में यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में युवाओं के उग्र आंदोलन के बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई।

एलयूसीसी कंपनी द्वारा 100 करोड़ से अधिक की ठगी के मामले में भी पीड़ितों के लंबे संघर्ष के बाद सीबीआई जांच शुरू हुई थी।

इन दोनों मामलों में पुलिस की जांच से पीड़ित संतुष्ट नहीं थे।

पूरे प्रदेश में प्रदर्शन, पुलिस जांच पर उठे सवाल

अंकिता केस में पुलिस ने एसआईटी गठित कर जांच पूरी की और चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने पिछले वर्ष मई में सजा पर फैसला भी सुना दिया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी बना हुआ है—आखिर वह वीआईपी कौन था?

उत्तराखंड पुलिस लगातार वीआईपी की भूमिका से इनकार करती रही, लेकिन परिजन और आमजन जांच से संतुष्ट नहीं दिखे। उर्मिला राठौर के वायरल ऑडियो ने मामले को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया, जिसके बाद सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश करनी पड़ी।

टूटे रिसॉर्ट में पुराने साक्ष्य ही बनेंगे आधार

इस घटना का केंद्र पौड़ी जिले में स्थित वनंतरा रिसॉर्ट रहा। अगस्त 2022 में मामले के सामने आने के बाद कार्रवाई के शुरुआती दौर में रिसॉर्ट का बड़ा हिस्सा बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया था। इस पर साक्ष्य नष्ट किए जाने के गंभीर आरोप लगे।

अब सीबीआई को पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों, तकनीकी जांच और परोक्ष सबूतों के आधार पर आगे बढ़ना होगा। माना जा रहा है कि संदिग्ध लोगों से पूछताछ का दायरा भी बढ़ाया जाएगा।

सीबीआई जांच में क्या होगा फोकस?

सीबीआई के हाथ में जांच आने के बाद:

कथित वीआईपी की पहचान पर सबसे ज्यादा ध्यान रहेगा।

यह देखा जाएगा कि क्या हत्या के अलावा कोई अन्य आरोपी या साजिशकर्ता शामिल था।

रिसॉर्ट में कथित अनैतिक गतिविधियों और ‘स्पेशल सर्विस’ के दबाव की भी जांच हो सकती है।

उर्मिला सनावर के ऑडियो क्लिप और उसमें किए गए दावों की फॉरेंसिक व तथ्यात्मक जांच संभव है।

अंकिता केस के अब तक अनसुलझे सवाल

रिसॉर्ट के सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर से छेड़छाड़ की सच्चाई क्या है? क्या डिलीट फुटेज पूरी तरह रिकवर हुए?

अंकिता का मोबाइल फोन देर से मिला—क्या उसकी आखिरी चैट और लोकेशन डेटा की पूरी जांच हुई?

एफआईआर दर्ज कराने के समय पटवारी की टालमटोल के पीछे कोई दबाव था क्या?

पोस्टमार्टम की शुरुआती और अंतिम रिपोर्ट में बताए गए विरोधाभास की असल वजह क्या थी?

वनंतरा रिसॉर्ट वन भूमि पर अवैध रूप से बना था या नहीं, और यदि हां तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई?

घटना के बाद रिसॉर्ट के अन्य कर्मचारी अचानक गायब क्यों हो गए?

सीबीआई जांच शुरू होने के साथ ही एक बार फिर उम्मीद जगी है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सभी अनसुलझे सवालों के जवाब सामने आ सकेंगे और वर्षों से छाया रहस्य आखिरकार खत्म होगा।

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