हाईकोर्ट को हल्द्वानी गौलापार में शिफ्ट करने की चर्चाओं के दौरान बार कांउसिल ऑफ उत्तराखंड द्वारा खरीदी गई जमीन को अब बेचे जाने के प्रस्ताव को चुनोती देती याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई
रिपोर्टर गुड़डू सिंह ठठोला
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाई कोर्ट को हल्द्वानी गौलापार में शिफ्ट करने की चर्चाओं के दौरान बार कांउसिल ऑफ उत्तराखंड के द्वारा अपने कार्यालय के लिए गौलापार में खरीदी गई 2 हजार स्क्वायर फिट की भूमि को एक प्रस्ताव पास कर अब उसे बेचे जाने के प्रस्ताव को चुनोती देती याचिका पर सुनवाई की।
मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की एकलपीठ ने उस प्रस्ताव पर रोक लगाते हुए बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड से चार सप्ताह में अपना जवाब पेश करने को कहा है साथ मे कोर्ट ने उस शपथपत्र पर प्रति शपथपत्र देने के आदेश याचिकाकर्ताओं को दिया है।
आपकों बता दे कि अधिवक्ता उज्ज्वल सुनाल व पृथ्वी लमगड़िया ने उच्च न्यायलय में याचिका दायर कर कहा है कि जब उच्च न्यायलय को गौलापार हल्द्वानी में शिफ्ट करने की चर्चाएं चल रही थी। और उच्च न्यायलय ने भी आदेश दे दिये था ।
केंद्र सरकार , राज्य सरकार व न्याय विभाग ने भी अपनी सहमति दे दी थी कि उच्च न्यायलय को गौलापार में शिफ्ट किया जाय। इसको देखते बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड ने भी अपने कार्यालय को शिफ्ट करने के लिए गौलापार में 2 हजार स्क्वायर फिट भूमि खरीदी गई।
जिसका शिलान्यास मुख्यमंत्री जी के द्वारा किया गया और इसे बनाने के लिए एक करोड़ स्वीकृत भी कर दिये गए। लेकिन उच्च न्यायलय के आदेश को हाई कोर्ट बार एसोशिएशन ने सर्वोच्च न्यायलय में चुनोती दी गयी।
सर्वोच्च न्यायलय ने उच्च न्यायलय के आदेश पर रोक लगा दी। 26 अगस्त 2024 को बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड ने एक प्रस्ताव पास कर यह निर्णय लिया कि अब इस भूमि की उन्हें आवश्यकता नही है क्योंकि अब उच्च न्यायलय शिफ्ट नही होगा। याचिका में कहा गया है कि अभी मामला सर्वोच्च न्यायलय में विचाराधीन है। अंतिम निर्णय नही आया है।
जबकि एसएलपी में राज्य सरकार की तरफ से अपने जवाब में कहा है कि केंद्र,राज्य व न्यायपालिका की संस्तुति है। किस आधार पर बार काउंसिल यह कह सकता है कि हाई कोर्ट शिफ्ट नही हो सकता।
इसलिए बार काउंसिल की भूमि को बेचने के प्रस्ताव पर रोक लगाई जाय। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने प्रस्ताव पर रोक लगाते हुए चार सप्ताह में अपना जवाब पेश करने को कहा है।

