नैनीताल/ओखलकांडा। वर्षों से चिकित्सक विहीन और बदहाल स्थिति में पड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) डालकन्या में आखिरकार स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर की तैनाती के आदेश जारी कर दिए हैं।
यह निर्णय राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू के नेतृत्व में ग्रामीणों द्वारा मुख्य चिकित्साधिकारी नैनीताल को सौंपे गए ज्ञापन के बाद लिया गया है।
हालांकि इस फैसले के साथ ही ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या यह व्यवस्था स्थायी होगी या फिर विधानसभा चुनाव तक ही सीमित रहेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से पीएचसी डालकन्या बिना चिकित्सक के संचालित हो रहा था।
चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। लगातार उपेक्षा के चलते स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति भी जर्जर होती चली गई और यह लगभग खंडहर में तब्दील हो गया।
ग्रामीणों ने राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू के नेतृत्व में मुख्य चिकित्साधिकारी नैनीताल से मुलाकात कर स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल चिकित्सक की नियुक्ति की मांग उठाई थी।
इसके बाद मुख्य चिकित्साधिकारी ने जारी करते हुए प्रभारी चिकित्साधिकारी एवं अपर मुख्य चिकित्साधिकारी प्रथम डॉ. गणेश सिंह धर्मशक्तू को निर्देश दिए गए कि डॉ. अवनीश कुमार को उनकी मूल तैनाती प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डालकन्या भेजना सुनिश्चित किया जाए।
आदेश में यह भी कहा गया है कि डॉ. गणेश सिंह धर्मशक्तू क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सप्ताह में चार दिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ओखलकांडा में भी अपनी चिकित्सकीय सेवाएं देंगे, ताकि दोनों क्षेत्रों के मरीजों को नियमित स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
इसके अलावा आदेश की प्रति अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एनएचएम) नैनीताल को भेजते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ओखलकांडा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत फ्री डायग्नोस्टिक योजना शुरू कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले का ग्रामीणों ने स्वागत किया है, लेकिन इसके साथ ही कई सवाल भी उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र की याद आई है, जबकि पिछले पांच वर्षों से अस्पताल में चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो सकी।
उनका आरोप है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने लंबे समय तक इस गंभीर समस्या पर कोई प्रभावी पहल नहीं की।
अब क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह नियुक्ति स्थायी रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी या फिर चुनावी माहौल समाप्त होने के बाद पहले जैसी स्थिति दोबारा बन जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि सालभर नियमित चिकित्सकीय सेवाएं चाहिए।
यदि डॉक्टरों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाएं निरंतर बनी रहती हैं तो यह क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत होगी, अन्यथा यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव में भी प्रमुख चुनावी विषय बन सकता है।


