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देहरादून। अपने हक और अधिकार के लिए सड़क से लेकर अदालतों तक आवाज बुलंद करने वाले संविदा कर्मचारियों के लिए नए साल से पहले बड़ी खुशखबरी आई है।

सरकार ने उनके नियमितीकरण के लिए बड़ा फैसला लिया है।

सरकार ने हाल ही में इसकेलिए मंत्रिमंडल की उपसमिति गठित करने का निर्णय है। यह समिति सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत करेगी। सरकार की इस पहल से संविदा कर्मचारी गदगद नजर आ रहे हैं।

बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने 2013 में नियमितीकरण नीति बनाई थी, जिसके तहत पाँच वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले कार्मिकों को नियमित करने का प्रावधान था।

कई विभागों में इसके आधार पर कर्मचारियों को नियमित किया गया, लेकिन कई विभागों की धीमी कार्रवाई के कारण अनेक कार्मिक इससे वंचित रह गए।

इसके बाद 2016 में विनियमितीकरण नियमावली लागू की गई, जिसमें वर्ष 2016 तक पाँच वर्ष सेवा करने वाले कार्मिकों को नियमित करने का निर्णय लिया गया था।

हालांकि विवादों के चलते यह नियमावली बाद में निरस्त कर दी गई। वर्ष 2018 से इस संबंध में नई नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया जारी है और मामला हाईकोर्ट तक पहुँच चुका है।

कैबिनेट ने अब हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप वर्ष 2018 तक दस वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले कार्मिकों को विनियमित करने पर सहमति जताई है।

साथ ही भविष्य में नियमितीकरण के लिए उपयुक्त कट-ऑफ डेट निर्धारित करने हेतु मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित करने का फैसला लिया गया है। समिति के सदस्यों के नाम जल्द घोषित किए जाएंगे।

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