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हल्द्वानी। कुमाऊं की आर्थिक राजधानी हल्द्वानी में बाहरी राज्यों के लोगों को उत्तराखंड का स्थायी निवासी बनाने का बड़ा खेल पकड़ा गया है। प्रशासनिक जांच के बाद 48 स्थायी निवास प्रमाणपत्र को रद कर दिया गया है।

चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले पांच साल से फर्जीवाड़ा चल रहा था। मगर किसी जिम्मेदार को भनक नहीं लगी। अभी तो केवल हल्द्वानी सदर यानी तहसील के शहरी क्षेत्र से जुड़े प्रमाणपत्रों की ही जांच हुई है। तहसील का बड़ा हिस्सा अभी बाकी है।ट

सिस्टम के अंदर की सेटिंग से स्थायी निवास प्रमाणपत्र के फर्जीवाड़े की तस्वीर पहली बार कमिश्नर कुमाऊं दीपक रावत के छापे से सामने आई थी। 13 नवंबर को कमिश्नर दीपक रावत ने बनभूलपुरा निवासी फर्जी अरायजनवीस मो. फैजान के घर छापा मारा था।

फैजान ने हल्द्वानी निवासी रईस नाम के व्यक्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बरेली के रईस का यहां स्थायी निवास प्रमाणपत्र बना दिया था। जिसके बाद तहसीलदार कुलदीप पांडे की तरफ से प्राथमिकी दर्ज कराने पर पुलिस ने फैजान, रईस और ऊर्जा निगम के डेटा आपरेटर दिनेश सिंह को गिरफ्तार किया गया था।

दिनेश 15 वर्ष पुराने बिजली बिल मुहैया कराता था। जिनके आधार पर फैजान अपणि सरकार पोर्टल पर प्रमाणपत्र बनाने के लिए आवेदन करता था। डेमोग्राफी चेंज से जुड़ा गंभीर मामला होने के कारण सीएम पुष्कर धामी ने भी जांच के बाद सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

जिसके बाद प्रशाासनिक अमला भी जांच में जुट गया। अभी तक हल्द्वानी सदर के 300 प्रमाणपत्रों की जांच हो चुकी है। जिन्हें 2020 से 2025 के बीच में बनाया गया था। इनमें से 48 प्रमाणपत्र झूठे दस्तावेजों के आधार पर तैयार करवाए गए थे।

300 से अधिक स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की जांच में 48 अब तक गलत पाए गए हैं। इन्हें निरस्त किया जा रहा है। जांच का सिलसिला अभी जारी है।

कुल 1200 स्थायी निवास प्रमाणपत्र की जांच होनी थी। इसमें से 300 की जांच पर 48 गलत पाए गए। हालांकि, कार्रवाई तब ही पूरी मानी जाएगी। जब इस फर्जीवाड़े में शामिल भी पकड़ में आएंगे।

प्रशासन के अनुसार इस संबंध में गहनता से जांच की जा रही है कि कैसे और किनके माध्यम से प्रमाणपत्र तैयार करवाए गए थे।

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