यूजीसी के कथित काले कानून के विरोध में सवर्ण समाज का आह्वान, 21 फरवरी को महारैली का ऐलान
हल्द्वानी। यूजीसी के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कथित काले कानून के विरोध में सवर्ण समाज की ओर से एक जनसभा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का संयोजन प्रकाश हर्बोला के नेतृत्व में किया गया, जिसमें क्षेत्र के अनेक प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया।
सभा में वक्ताओं ने एक स्वर में इस कानून को सवर्ण समाज और विशेषकर बच्चों के भविष्य के लिए घातक बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। संयोजक प्रकाश हर्बोला ने कहा कि यह कानून सवर्ण समाज पर थोपा गया है और इससे शैक्षणिक संस्थानों में असमानता बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज अब तक विभिन्न कानूनों और नीतियों पर चुप रहा, लेकिन अब और चुप रहना संभव नहीं है।
वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते संगठित होकर विरोध नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
विनोद साही ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि मोहन काण्डपाल ने समाज को एकजुट रहने का आह्वान किया।
डिप्लोमा इंजीनियर संघ के प्रदेश अध्यक्ष जे.एस. बिष्ट ने कहा कि सवर्ण समाज लंबे समय से विभिन्न नीतियों के कारण नुकसान झेलता आ रहा है, लेकिन अब आंदोलन को निर्णायक मोड़ तक ले जाना आवश्यक है।
भुवन भट्ट ने मांग रखी कि यदि कानून लागू किया ही जाता है तो सभी विद्यार्थियों को समान अधिकार दिए जाएं और झूठी शिकायतों पर सख्त दंड का प्रावधान हो।
सभा में ज्योति अवस्थी ने कविता के माध्यम से सरकार को चेताया और जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर एकजुट होने का संदेश दिया।
अंत में सर्वसम्मति से आंदोलन को कल्कि सेना (ट्रस्ट) के बैनर तले संचालित करने का निर्णय लिया गया।
इस दौरान 9 सदस्यीय समिति का गठन किया गया और आगामी 21 फरवरी 2026 को एक प्रचंड महारैली आयोजित करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
रैली में महिलाओं और युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की गई।
कार्यक्रम का संचालन भुवन भट्ट ने किया। सभा में प्रताप जोशी, गणेश जन्तवाल, विशाल शर्मा, गौरव गोस्वामी, देवेंद्र खाती, सीमा बत्रा, नेहा चंदोला सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

