वन पंचायत सरपंच बुद्ध पार्क में गरजे,आंदोलन की चेतावनी
हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे दर्जनों वन पंचायत सरपंचों ने हरीश पनेरू के नेतृत्व में शनिवार को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
वन पंचायत सरपंचों ने लंबे समय से लंबित मानदेय की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। प्रदर्शन को पूर्व दर्जा राज्य मंत्री एवं राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू ने भी समर्थन दिया।
प्रदर्शन के दौरान वन पंचायत सरपंचों ने कहा कि प्रदेश में वन पंचायत व्यवस्था वर्षों से ग्रामीणों और जंगलों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रही है। वन पंचायतों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर जंगलों के संरक्षण, संवर्धन और वन संसाधनों की देखरेख में सरपंचों एवं पंचों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद उन्हें उनकी जिम्मेदारियों के एवज में कोई नियमित मानदेय नहीं दिया जा रहा है।
वन पंचायत संगठन कुमाऊं की अध्यक्ष निशा जोशी ने कहा कि वन पंचायत सरपंच और पंच लंबे समय से बिना मानदेय के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1931 से चली आ रही वन पंचायत व्यवस्था के तहत वन पंचायतों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ी हैं, लेकिन सरपंचों और पंचों की आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार ने अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि वन पंचायत सरपंचों और पंचों के लिए जल्द से जल्द सम्मानजनक मानदेय निर्धारित किया जाए, ताकि वे आर्थिक दबाव के बावजूद वन संरक्षण की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभा सकें।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनकी मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों पर भी जमकर निशाना साधा गया। सरपंचों ने कहा कि राजनीतिक दल चुनाव के दौरान ग्रामीणों और वन पंचायतों से जुड़े मुद्दों को उठाने का भरोसा देते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनकी समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी जाती।
प्रदर्शन में शामिल सरपंचों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आगामी विधानसभा चुनाव में चुनाव बहिष्कार किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान “मानदेय नहीं तो वोट नहीं” का नारा भी जोर-शोर से लगाया गया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वन पंचायतें केवल कागजी व्यवस्था नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जंगलों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में उनकी अहम भूमिका है।
ऐसे में सरकार को वन पंचायत सरपंचों और पंचों की मांग को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए। सरपंचों ने स्पष्ट किया कि मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।








