“अतिक्रमण हटाने के बाद बढ़ा विवाद: स्कूल संचालक पर दबंगई के आरोप, पत्रकार पर केस से उठे सवाल”
हल्द्वानी। रामपुर रोड स्थित पंचायत घर चौराहे के पास माउंट लिटेरा जी स्कूल से जुड़ा मामला अब केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह दबंगई, स्थानीय लोगों के साथ दुर्व्यवहार और स्वतंत्र पत्रकारिता पर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, रामपुर रोड के बैलपोखरा क्षेत्र स्थित न्यू आदर्श कॉलोनी के निवासियों ने शिकायत की थी कि कॉलोनी के 15 फीट चौड़े पारंपरिक सार्वजनिक मार्ग पर स्कूल निर्माण के दौरान गेट लगाकर रास्ता बाधित कर दिया गया है। इस मामले को जनता मिलन कार्यक्रम में कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री सचिव आईएएस दीपक रावत के समक्ष उठाया गया था।
शिकायत की सुनवाई के दौरान आयुक्त दीपक रावत ने स्कूल संचालक गिरजेश पांडे को कड़ी फटकार लगाते हुए सार्वजनिक मार्ग से अतिक्रमण तत्काल हटाने के निर्देश दिए। इसके बाद 31 मार्च 2026 को प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दोनों अवैध गेटों को ध्वस्त कर मार्ग को पुनः बहाल कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली।
कॉलोनीवासियों ने अपनी लिखित शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि गिरजेश पांडे और उनकी पत्नी अंजना पांडे द्वारा आए दिन गाली-गलौज, अभद्र व्यवहार और मारपीट जैसी घटनाएं की जाती रही हैं, जिससे क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल बना रहता है। लोगों का यह भी कहना है कि यदि स्कूल प्रबंधन सही था, तो आयुक्त के समक्ष ठोस साक्ष्य क्यों नहीं रखे गए।
वहीं, इस पूरे मामले को उजागर करने वाले स्वतंत्र पत्रकार संजय पाठक की भूमिका भी चर्चा में है।
बताया जा रहा है कि जनहित से जुड़े इस मुद्दे को सामने लाने के बाद स्कूल संचालक की ओर से पहले उन्हें कानूनी नोटिस भेजा गया और फिर एसीजेएम न्यायालय में आपराधिक मामला दर्ज कराया गया। इसे पत्रकार पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनहित के मुद्दों को उजागर करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह मामला समय रहते सामने नहीं आता, तो उनका रास्ता आज भी बाधित रहता।
फिलहाल आयुक्त दीपक रावत के हस्तक्षेप से न्यू आदर्श कॉलोनी, पंचायत घर रामपुर रोड का मार्ग बहाल हो चुका है, लेकिन यह मामला कानून के पालन, नागरिक अधिकारों और स्वतंत्र पत्रकारिता की स्थिति पर गंभीर बहस को जन्म दे रहा है।

