देहरादून। उत्तराखंड के जिला सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आयकर विभाग की इंटेलिजेंस और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन टीम की हालिया जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि प्रदेश के तीन जिला सहकारी बैंकों ने संदिग्ध लेनदेन की जानकारी छिपाकर खातेदारों को कर चोरी में मदद की।
जांच में सामने आया कि जिला सहकारी बैंक उत्तरकाशी, जिला सहकारी बैंक कोटद्वार और जिला सहकारी बैंक काशीपुर ने करीब 800 करोड़ रुपये के बड़े ट्रांजेक्शन की जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी। इसके अलावा 400 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन में पैन (PAN) नंबर तक दर्ज नहीं किए गए, जिससे खातेदारों ने इन रकमों को अपने आयकर रिटर्न में शामिल नहीं किया।
इस गंभीर अनियमितता के बाद आयकर विभाग ने बैंकों पर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक बैंक पर 50 हजार रुपये का एकमुश्त जुर्माना लगाया जाएगा, साथ ही लेनदेन छिपाने की अवधि के अनुसार प्रतिदिन 500 से 1000 रुपये तक अतिरिक्त जुर्माना भी वसूला जाएगा।
विभाग ने उन खाताधारकों की भी पहचान कर ली है, जिनके लेनदेन को छिपाया गया। अब उनके आयकर रिटर्न की गहन जांच की जाएगी और कर चोरी पाए जाने पर ब्याज सहित वसूली की जाएगी।
इधर, जिला सहकारी बैंक हरिद्वार की जांच भी जारी है। आयकर अधिकारी विपिन भट्ट के नेतृत्व में टीम ने रुड़की मुख्यालय में दस्तावेजों की जांच की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यहां और भी बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
