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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटिशन) को किया खारिज

नैनीताल। उत्तराखंड में पंचायत चुनावों को लेकर एक बार फिर हाईकोर्ट के आदेश ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटिशन) को खारिज करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने अपने 11 जुलाई के आदेश को बरकरार रखा है।

अदालत ने साफ कर दिया है कि पंचायत चुनाव केवल उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम के मुताबिक ही कराए जाएं।

11 जुलाई को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि किसी भी व्यक्ति का नाम दो जगह — यानी शहरी (नगर निकाय) और ग्रामीण (पंचायत) — दोनों मतदाता सूचियों में नहीं होना चाहिए।

कोर्ट ने ऐसे दोहरे मतदाताओं के नामांकन को अमान्य ठहराया था। इसके खिलाफ राज्य निर्वाचन आयोग ने रिव्यू पिटिशन दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने अब खारिज कर दिया है।

राज्य निर्वाचन आयोग की दलील थी कि मतदाता सूची में नाम होने का फैसला चुनाव आयोग के क्षेत्राधिकार में आता है, और यह पंचायतीराज अधिनियम के प्रावधानों के साथ संविधान के अनुच्छेद 243K के तहत सुरक्षित है।

लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि दोहरी मतदाता सूची का मामला चुनावी नैतिकता और पारदर्शिता से जुड़ा है और यह कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं हो सकता।

चुनाव पर नहीं लगी रोक – 

हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि वह पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर रोक नहीं लगा रहा है।

यानी चुनाव तय समय पर हो सकते हैं। लेकिन अगर किसी को आपत्ति है, तो वह चुनाव संपन्न होने के बाद इलेक्शन पिटिशन के रूप में अपनी शिकायत दाखिल कर सकता है।

इस फैसले से राज्य में पंचायत चुनावों को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है। कई उम्मीदवारों के नामांकन इस आधार पर रद्द हो सकते हैं कि उनके नाम नगर निकाय और पंचायत  दोनों जगह के मतदाता सूची में हैं।

राजनीतिक हलकों में इस आदेश की व्यापक चर्चा है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां हाल ही में दावेदारों ने दोनों जगह नामांकन दाखिल किए हैं।

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