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उत्तराखंड के सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बढ़ती बदतमीजी और हिंसा की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए शासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम लागू कर दिए हैं। खास तौर पर हाल ही में शिक्षा निदेशालय में हुई मारपीट की घटना के बाद यह फैसला लिया गया है।

अब ड्यूटी पर तैनात किसी भी अधिकारी या कर्मचारी से दुर्व्यवहार, गाली-गलौज या मारपीट करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज होगी और दोषियों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

शासन द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, यह व्यवस्था उत्तराखंड के सभी सरकारी कार्यालयों—निदेशालयों, जिलाधिकारी परिसरों, ब्लॉक कार्यालयों, शिक्षण एवं चिकित्सा संस्थानों—में लागू होगी। हालांकि सचिवालय और विधानसभा जैसे पहले से विशेष सुरक्षा वाले परिसरों को इससे अलग रखा गया है। SOP आम जनता, ठेकेदारों, जनप्रतिनिधियों, उनके समर्थकों और व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों (PSO) पर समान रूप से लागू होगी।

ऑफिस एंट्री पर कड़े नियम

अब सभी नियमित और संविदा कर्मचारियों को कार्यालय परिसर में पहचान पत्र पहनना अनिवार्य होगा। आम जनता के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। विशिष्ट व्यक्तियों और दिव्यांगजनों के वाहनों को अंडर-व्हीकल मिरर से जांच के बाद ही अनुमति मिलेगी। प्रवेश द्वारों पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर और शारीरिक जांच अनिवार्य की गई है। दुर्व्यवहार करने वालों के लिए फोटोयुक्त “नो एंट्री” पंजिका भी रखी जाएगी।

विजिटर्स के लिए नया सिस्टम

आगंतुकों की उच्च गुणवत्ता वाली फोटो और वैध सरकारी पहचान पत्र (आधार/वोटर आईडी) के साथ डिजिटल एंट्री होगी। सत्यापन के बाद QR कोड या RFID बैज दिया जाएगा, जिससे आगंतुक केवल निर्धारित मीटिंग जोन तक ही जा सकेगा। वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने के लिए पहले से समय लेना जरूरी होगा, बिना अपॉइंटमेंट प्रवेश से रोका जा सकेगा।

व्यवहार और बैठक का प्रोटोकॉल

सरकारी कर्मियों के साथ अमर्यादित भाषा, नारेबाजी या उत्तेजक व्यवहार पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। अधिकारी के कक्ष में एक समय में अधिकतम दो व्यक्ति ही प्रवेश कर सकेंगे। दो से अधिक लोगों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक केवल CCTV युक्त कॉन्फ्रेंस रूम में होगी। वीआईपी के साथ आने वाले सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों को अपने हथियार रिसेप्शन पर जमा कराने होंगे।

सुरक्षा तकनीक और सख्त कार्रवाई

कार्यालयों में ऑडियो रिकॉर्डिंग युक्त HD CCTV कैमरे लगाए जाएंगे, जिनका बैकअप कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रहेगा। अधिकारियों की डेस्क और रिसेप्शन के नीचे साइलेंट पैनिक अलार्म बटन लगाए जाएंगे।

लोक सेवक के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की या मारपीट की स्थिति में BNS की धाराओं में तत्काल केस दर्ज होगा, आरोपी को परिसर से निष्कासित कर ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। ऐसी घटनाओं की जांच इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी दो महीने के भीतर पूरी करेगा और साक्ष्यों की सुरक्षा के लिए घटनास्थल को तुरंत सील किया जाएगा।

शासन ने निर्देश दिए हैं कि सभी कार्यालयों में आगंतुकों के लिए आचार संहिता, दंडात्मक कार्रवाइयों की जानकारी और आपातकालीन संपर्क नंबर प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किए जाएं, ताकि नियमों की जानकारी सभी को स्पष्ट रूप से हो सके।

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