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देहरादून। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी से जुड़े विवाद और यूजीसी एक्ट को लेकर उत्तराखंड में सियासी और सामाजिक बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार कई संगठन सरकार के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।

इसी कड़ी में अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा ने देहरादून में सांकेतिक धरना देकर अपना विरोध जताया।
धरना प्रदर्शन के दौरान ब्राह्मण समाज के अपमान, शंकराचार्य से माफी न मांगने, सरकार की कथित हठधर्मिता और यूजीसी एक्ट के विरोध को लेकर नारेबाजी की गई। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने कहा कि सरकार को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि ब्राह्मणों के खिलाफ टिप्पणी और दुर्व्यवहार करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यूजीसी एक्ट को तत्काल वापस लेने और अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम जयंती पर अवकाश घोषित करने की भी पुरजोर मांग की गई।
प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ब्राह्मण समाज की अनदेखी करती रही और समाज में किसी भी स्तर पर ब्राह्मणों का अपमान किया गया, तो इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो जन आंदोलन कर सड़कों पर उतरकर विरोध किया जाएगा।
धरना स्थल पर मौजूद कांग्रेस नेता लालचंद शर्मा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह से ब्राह्मणों और शंकराचार्य का अपमान किया गया है, वह निंदनीय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य का अपमान यूपी सरकार द्वारा किया गया है, जिसके खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना और सड़कों पर आंदोलन किया जाएगा।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में शंकराचार्य विवाद को लेकर संत समाज और तीर्थ पुरोहित समाज एकजुट हो चुका है।

हरिद्वार से लेकर देहरादून समेत प्रदेश के कई जिलों में सामाजिक और धार्मिक संगठन खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में सामने आ रहे हैं। लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
वहीं, अब यूजीसी एक्ट को लेकर भी कई संगठन और छात्र संगठन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं, जिससे प्रदेश का राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है।

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