ऋषिकेश। 6 अप्रैल की दोपहर ऋषिकेश के गंगा बैराज पर एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब पहली बार पवित्र गंगा की लहरों पर सी-प्लेन की सफल ट्रायल लैंडिंग हुई।
इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों की तालियों और उत्साह ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ एक परीक्षण नहीं, बल्कि उत्तराखंड में हवाई पर्यटन के नए युग की शुरुआत है।
जैसे ही सी-प्लेन ने गंगा की सतह को छुआ और सुरक्षित रुका, वहां मौजूद लोग रोमांचित हो उठे। नदी पर विमान उतरने का यह दृश्य उत्तराखंड के लिए बिल्कुल नया था। तकनीकी रूप से यह ट्रायल पूरी तरह सफल रहा, जिससे भविष्य में नियमित सेवा शुरू होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
इस पहल को प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की आधुनिक पर्यटन को बढ़ावा देने की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्य सरकार लंबे समय से उत्तराखंड को पारंपरिक तीर्थाटन से आगे बढ़ाकर एडवेंचर और हाई-एंड टूरिज्म के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सी-प्लेन सेवा शुरू होने से चारधाम यात्रियों को बड़ा फायदा मिलेगा। देश के बड़े शहरों से आने वाले श्रद्धालु बिना लंबी और थकाऊ सड़क यात्रा के सीधे ऋषिकेश पहुंच सकेंगे। वहीं एडवेंचर टूरिज्म के लिहाज से भी यह सेवा महत्वपूर्ण साबित होगी, क्योंकि विदेशी पर्यटकों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकेगी।
सरकार की योजना इसे केवल ऋषिकेश तक सीमित रखने की नहीं है। टिहरी झील, नैनीताल झील सहित अन्य जलाशयों पर भी सी-प्लेन सेवा शुरू करने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। अगर यह योजना साकार होती है, तो उत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य बन सकता है जहां कई जल स्थलों से सी-प्लेन सेवा संचालित होगी।
इस सेवा से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होटल, गाइड, नाविक और छोटे कारोबारियों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
कुल मिलाकर, गंगा पर उतरा यह सी-प्लेन उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र के लिए नई उड़ान का संकेत बनकर उभरा है।

