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उत्तराखंड में वर्ष 2026 का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार, 3 मार्च को लगेगा। यह ग्रहण दोपहर 3:27 बजे से शुरू होकर शाम 6:46 बजे तक रहेगा। सूतक काल सुबह 6:20 बजे से प्रभावी हो जाएगा, जिसके चलते धार्मिक गतिविधियों पर विशेष प्रतिबंध रहेगा।

ग्रहण के कारण होली से जुड़े कार्य भी प्रभावित रहेंगे। सूतक काल में होलिका पूजन और दहन के कार्यक्रम नहीं किए जाएंगे। मंदिरों में प्रवेश, मूर्ति स्पर्श, भोजन और यात्रा जैसे कार्य वर्जित माने गए हैं।

हालांकि बच्चे, वृद्ध और रोगी आवश्यकता पड़ने पर भोजन कर सकते हैं। भोजन सामग्री जैसे दूध, दही और घी में कुश या तुलसी का पत्ता रखने की सलाह दी गई है।

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डा. चंडी प्रसाद घिल्डियाल के अनुसार यह खग्रास चंद्रग्रहण भारत के सुदूर पूर्वी भागों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा, जबकि देश के अन्य हिस्सों में खंड चंद्रग्रहण का मोक्ष ही दृष्टिगोचर होगा।

ग्रहण के चलते हर की पैड़ी पर शाम 6:20 बजे होने वाली गंगा आरती अब रात 8 बजे आयोजित की जाएगी। श्रीगंगा सभा की ओर से श्रद्धालुओं को सूचित किया गया है कि वे अपने कार्यक्रम इसी अनुसार निर्धारित करें।

ग्रहण मोक्ष के बाद शाम 6:47 बजे मंदिरों और घाटों पर साफ-सफाई की जाएगी, तत्पश्चात विधिविधान से पूजा-अर्चना संपन्न होगी। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे ग्रहण काल से जुड़े नियमों का पालन करें और सावधानी बरतें।

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