पंचायत चुनाव में हाईकोर्ट की रोक के बाद छुट्टी लेकर ग्राम प्रधान और बीडीसी सदस्य बनने की आस में महानगरों से घर लौटे युवाओं की उम्मीद को झटका लगा है। युवा हाईकोर्ट से रोक हटने का इंतजार कर रहे हैं।
चुनाव के लिए लाखों रुपये मतदाताओं को रिझाने के लिए खर्च कर चुके प्रत्याशियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। अल्मोड़ा जिले में 1106 ग्राम पंचायतें हैं।
जिन ग्राम पंचायतों में पुरुषों के लिए सीट आरक्षित हैं उन सीटों पर महानगरों में प्राइवेट नौकरी करने वाले युवा घर आकर दावेदारी कर रहे हैं। वह घर-घर जाकर अपनी प्राथमिकता बता रहे हैं।
युवाओं का कहना है कि सरकार ने अधूरी तैयारियों के साथ पंचायत चुनावों का ऐलान कर दिया। इसी कारण हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव पर रोक लगा दी है।
वह चुनावी प्रचार-प्रसार के लिए काफी रुपये खर्च कर चुके हैं। उन्होंने सरकार से अपना मजबूत पक्ष कोर्ट में रखकर जल्द से जल्द चुनाव कराने की अपील की है।
पंचायत चुनाव विलंब से होने से अब गांव की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है। गांवों में कई लोगों ने चुनाव लड़ने का मन बनाया हो, मगर वे चुप्पी साधे थे।
जैसे ही अधिसूचना जारी हुई तो चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट तेज हो गई और कई लोगों ने दावेदार के रूप में प्रकट होकर प्रचार की दिशा में कदम बढ़ा लिए।
इससे गांवों में दावेदार सामने आ गए। अब विलंब हुआ तो गुटबाजी जैसी स्थितियां बढ़ जाएंगी और दावेदार घट-बढ़ सकते हैं।
विलंब से वोटरों को अपने-अपने पक्ष में लामबंद करने का खेल खेलने तथा अपने गुट से नया दावेदार मैदान में उतारने का अवसर मिल जाएगा।





