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नैनीताल। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को धरातल पर उतारने में आ रही प्रशासनिक एवं वित्तीय समस्याओं के समाधान तथा ग्राम प्रधान संगठन की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर नैनीताल जनपद के विभिन्न विकासखंडों के ग्राम प्रधानों ने जिला अध्यक्ष गोपाल सिंह अधिकारी के नेतृत्व में मुख्य विकास अधिकारी, नैनीताल से मुलाकात की।

ग्राम प्रधानों ने सीडीओ को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगों पर विस्तार से चर्चा की और शासन स्तर पर प्रभावी पैरवी कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय कराने की मांग की।

ग्राम प्रधानों का कहना था कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण और पहली इकाई हैं। गांवों में सड़क, पेयजल, आवास, रोजगार, स्वच्छता सहित तमाम विकास कार्यों को लागू करने में ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन पर्याप्त वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार नहीं होने के कारण कई योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कतें आती हैं।

प्रधानों ने पंचायतों को अधिक अधिकार और पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मनरेगा में मजदूरी बढ़ाने और उपस्थिति ऑफलाइन करने की मांग

ग्राम प्रधानों ने मनरेगा में श्रमिकों की उपस्थिति ऑफलाइन किए जाने की मांग उठाई। साथ ही अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 600 रुपये तथा कुशल श्रमिकों की मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन किए जाने की मांग की गई। इस मुद्दे को ब्लॉक अध्यक्ष भीमताल लक्ष्मण सिंह गंगोला, किशन दर्मवाल एवं मनीष भट्ट ने प्रमुखता से रखा।

राज्य एवं केंद्रीय वित्त की धनराशि बढ़ाने पर जोर

प्रधानों ने ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त से मिलने वाली धनराशि को जनसंख्या के साथ-साथ ग्राम पंचायतों के भौगोलिक क्षेत्रफल को आधार बनाकर बढ़ाने की मांग की। ब्लॉक अध्यक्ष कोटाबाग सुरेंद्र बोहरा, दिनेश जोशी एवं तारेश बिष्ट ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है।

जिला योजना में ग्राम पंचायतों को प्रतिनिधित्व

ग्राम प्रधानों ने जिला योजना में ग्राम पंचायतों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने तथा ग्राम प्रधानों को जिला योजना समिति में प्रतिनिधित्व देने की मांग भी रखी। इस संबंध में ब्लॉक अध्यक्ष रामगढ़ नंदन सिंह बिष्ट, सीमा पाठक एवं पूजा बिष्ट ने अपनी बात रखी।

प्रधानों के लिए 20 हजार रुपये मानदेय की मांग

संगठन ने ग्राम प्रधानों को न्यूनतम 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने तथा ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्यों को भी मानदेय उपलब्ध कराने की मांग की। प्रेमा देवी, ऋतु जोशी और गीता डोगरा ने इस मांग को प्रमुखता से उठाया।

29 विभागों को पंचायतों को हस्तांतरित करने की मांग

ग्राम प्रधानों ने पंचायतीराज अधिनियम में वर्णित 29 विभागों को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने की मांग की। कपिल देवका, मनीष कुल्याल और कमल बेलवाल ने कहा कि ग्राम पंचायतों को अधिकार मिलने से स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने और विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी।

विधायक-सांसद निधि की तर्ज पर हो ग्राम प्रधान निधि

प्रधानों ने विधायक और सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि की व्यवस्था किए जाने की मांग रखी। मुकेश पलड़िया, मुन्नी देवी और यशवंत कार्की ने कहा कि ग्राम प्रधानों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार छोटे-छोटे विकास कार्य कराने के लिए स्वतंत्र वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने चाहिए।

10 लाख तक के कार्य ग्राम पंचायतों से कराने की मांग

ग्राम पंचायतों में 10 लाख रुपये तक के निर्माण कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायत को बनाए जाने की मांग भी की गई। प्रकाश पांडे, देवेंद्र कुमार और जितेंद्र चनौतिया ने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी।

प्रधानों और परिवारों के लिए बीमा की मांग

ग्राम प्रधानों एवं उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा की व्यवस्था किए जाने की मांग दिनेश बिष्ट और प्रदीप कुमार ने प्रमुखता से उठाई। प्रधानों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के रूप में जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाले ग्राम प्रधानों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

पीएम आवास योजना-प्लस में पात्रों को शामिल करने की मांग

प्रधानों ने प्रधानमंत्री आवास योजना-प्लस की प्राथमिकता सूची में पात्र लाभार्थियों के नाम शामिल करने की मांग की। राधा कुल्याल और पूजा बिष्ट ने कहा कि कई पात्र ग्रामीण परिवार आवास की सुविधा से वंचित हैं, इसलिए पात्रता के आधार पर ऐसे परिवारों को योजना का लाभ दिया जाना जरूरी है।

टैक्स की बाध्यता में संशोधन की मांग

ग्राम पंचायतों पर टैक्स लगाने की बाध्यता तथा टैक्स नहीं लगाने पर 16वें वित्त की धनराशि में कटौती के प्रावधान में संशोधन की मांग भी उठाई गई। गोपाल सिंह अधिकारी, लक्ष्मण सिंह गंगोला और सुरेंद्र बोहरा ने कहा कि ग्राम पंचायतों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डालने के बजाय उनकी आर्थिक स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

ग्राम प्रधान संगठन ने कहा कि उनकी 10 सूत्रीय मांगों का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाना, स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना है। संगठन ने मुख्य विकास अधिकारी से मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाने और प्रभावी पैरवी करने का आग्रह किया।

जिला अध्यक्ष गोपाल सिंह अधिकारी ने कहा कि ग्राम प्रधान गांव की जनता और शासन-प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि ग्राम पंचायतों को पर्याप्त अधिकार, वित्तीय संसाधन और प्रशासनिक सहयोग मिले तो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों को अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है।

इस दौरान नैनीताल जनपद के विभिन्न विकासखंडों से पहुंचे ग्राम प्रधानों ने संगठन की सभी 10 सूत्रीय मांगों के समर्थन में एकजुटता जताई और मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद व्यक्त की।

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