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बेटे की मौत से बिखरा परिवार, न्याय में देरी से पिता ने किया देश त्याग

सेक्टर-150 हादसा: ‘पापा मुझे बचा लो’ की गुहार के बीच गई जान, न्याय की आस में टूटे पिता लंदन रवाना

ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-150 में 16 जनवरी 2026 की रात घने कोहरे के बीच हुए दर्दनाक हादसे ने एक परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया। 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार अनियंत्रित होकर नाले की दीवार तोड़ते हुए बेसमेंट निर्माण के लिए खोदे गए गहरे, पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवराज कार की छत पर चढ़कर करीब दो घंटे तक मदद की गुहार लगाते रहे—“पापा मुझे बचा लो”—लेकिन बचाव कार्य में देरी और संसाधनों की कमी के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।

पुलिस, दमकल, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त अभियान चलाया, लेकिन लगभग पांच घंटे बाद युवराज का शव बाहर निकाला जा सका। युवराज गुरुग्राम की एक कंपनी में कार्यरत थे और अपने पिता राजकुमार मेहता के साथ यूरेका पार्क सोसायटी में रहते थे। उनकी मां का पहले ही निधन हो चुका था और पत्नी से अलगाव के बाद वे ही पिता का एकमात्र सहारा थे।

पिता टूटे, बेटी के पास लंदन गए

हादसे के बाद राजकुमार मेहता पूरी तरह टूट गए। रिश्तेदार कुछ दिनों तक साथ रहे, लेकिन बाद में लौट गए। घटना के 16 दिन बाद लंदन में रह रही उनकी बेटी भारत आई और पिता की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। कुछ दिन नोएडा और दिल्ली में रुकने के बाद वह उन्हें अपने साथ लंदन ले गई। परिवार का कहना है कि सिस्टम की लापरवाही और न्याय में देरी से वे गहरे निराश हैं। खाली घर में रहना उनके लिए असहनीय हो गया था।

जांच पर सवाल, रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं

घटना के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष जांच दल (SIT) गठित कर पांच दिन में रिपोर्ट तलब की थी। हालांकि रिपोर्ट करीब 20 दिन बाद सौंपी गई, लेकिन अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। हादसे के दो दिन बाद नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को हटाया गया और कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। बिल्डर कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर एक डायरेक्टर की गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन मुख्य जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई न होने से सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले गड्ढे पर पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी नहीं थी, जो स्पष्ट लापरवाही दर्शाता है। एक महीना बीतने के बावजूद एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से परिवार और क्षेत्रवासियों में निराशा है।

युवराज मेहता की मौत ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। पिता अब लंदन में बेटी के साथ हैं—शायद शांति की तलाश में—लेकिन न्याय की उम्मीद अभी बाकी है।

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