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नौ होम लोन समेत 11 ऋण खातों में जालसाजी का आरोप, लोन धारकों के साथ पैनल अधिवक्ता और वैल्यूअर समेत 18 लोगों पर मुकदमा

लखनऊ। नैनीताल बैंक की हसनगंज शाखा में फर्जी दस्तावेज, जाली पहचान पत्र और कथित कूटरचित संपत्ति अभिलेखों के आधार पर नौ आवासीय ऋण समेत कुल 11 लोन स्वीकृत कराकर करीब 1.87 करोड़ रुपये की बैंक रकम हड़पने का मामला सामने आया है। बैंक की आंतरिक जांच में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद शाखा प्रबंधक ने हसनगंज कोतवाली में लोन धारकों, पैनल अधिवक्ताओं और वैल्यूअर समेत 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

पुलिस के अनुसार मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इंस्पेक्टर चितवन कुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान बैंक से संबंधित दस्तावेज, लोन फाइलें, संपत्ति के अभिलेख और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।

2025 में स्वीकृत हुए थे 11 लोन

शाखा प्रबंधक के मुताबिक, 17 मई से 27 जून 2025 के बीच अभिषेक अग्रवाल शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे। इसी अवधि में बैंक से नौ आवास ऋण समेत कुल 11 ऋण स्वीकृत किए गए। इन खातों में समय से किस्तों का भुगतान नहीं हुआ और धीरे-धीरे सभी खाते एनपीए की स्थिति में पहुंच गए।

बैंक की ओर से जब संबंधित ऋण धारकों को नोटिस भेजे गए तो कथित तौर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद बैंक ने ऋण के एवज में गिरवी रखी गई संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच शुरू की। जांच में बिक्री विलेख, पहचान पत्र और संपत्ति से जुड़े अन्य कागजात संदिग्ध पाए गए।

असली मालिकों की जगह दूसरे लोगों को खड़ा करने का आरोप

बैंक की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फर्जीवाड़े में शामिल लोगों ने संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों पर जाली मोहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया। आरोप है कि संपत्ति के वास्तविक मालिकों की जगह दूसरे लोगों को खड़ा कर उन्हें वास्तविक मालिक के रूप में प्रस्तुत किया गया और उन्हीं के माध्यम से संपत्तियों को बैंक के पास बंधक रखकर ऋण हासिल किया गया।

बैंक की टीम जब संबंधित संपत्तियों का सत्यापन करने मौके पर पहुंची तो कथित तौर पर वास्तविक मालिक सामने आए और उन्होंने इन ऋणों से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया। इसके बाद बैंक को दस्तावेजों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका हुई।

पैनल अधिवक्ताओं और वैल्यूअर पर भी आरोप

मामले में बैंक ने अपने पैनल अधिवक्ताओं आशीष सिंह और नरेंद्र सिंह मेहता की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत के मुताबिक, दोनों पर संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर गलत रिपोर्ट तैयार करने का आरोप है।

वहीं पैनल वैल्यूअर सत्येंद्र कुमार वर्मा पर संपत्तियों का मूल्य कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर आंकने का आरोप लगाया गया है। बैंक का आरोप है कि गलत स्वामित्व रिपोर्ट और कथित तौर पर बढ़े हुए मूल्यांकन के आधार पर ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया को मदद मिली।

करीब 1.94 करोड़ रुपये के लोन का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और कथित जाली पहचान के सहारे करीब 1.94 करोड़ रुपये के ऋण हासिल किए। इनमें से बकाया राशि करीब 1,87,55,682 रुपये बताई गई है।

ऋण खातों के एनपीए में जाने के बाद बैंक ने जब वसूली की प्रक्रिया शुरू की तो गिरवी संपत्तियों और दस्तावेजों के सत्यापन में कथित फर्जीवाड़ा सामने आया।

कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

बताया गया है कि बैंक की ओर से शिकायत दिए जाने के बावजूद जब अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। कोर्ट के आदेश के बाद हसनगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया।

मामले में भारती अग्रवाल, रूचि अग्रवाल, ज्ञान सिंह, बाबू लाल, आशीष सिंह, नरेंद्र सिंह मेहता, सत्येंद्र कुमार वर्मा, भावना रस्तोगी, दिवाकर उपाध्याय, अभिषेक अस्थाना, मोहम्मद उमैर, शेख मोहम्मद सलीम, मोहम्मद रेहान, आफताब आलम, शहजाद आलम, मुकेश यादव, मार्डन फर्नीचर और मो. उमेर को नामजद किया गया है।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई

फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक से ऋण से संबंधित दस्तावेज, पहचान पत्र, संपत्ति के कागजात, मूल्यांकन रिपोर्ट और अधिवक्ताओं की रिपोर्ट की जांच करेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, वास्तविक संपत्ति मालिकों की जगह किन लोगों को पेश किया गया और ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया में किस-किस की भूमिका रही।

पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जीवाड़े में प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका थी और बैंक से रकम हासिल करने की पूरी साजिश किस तरह अंजाम दी गई।

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