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हल्द्वानी। रोडवेज बस अड्डे की बदहाल व्यवस्था अब कर्मचारियों और यात्रियों दोनों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। जहां एक ओर कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है, वहीं दूसरी ओर जर्जर बसें और बुनियादी सुविधाओं का अभाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

कर्मचारियों के अनुसार नियमित स्टाफ को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है, जबकि एजेंसी कर्मियों का चार माह से भुगतान लंबित है। इससे उनके सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कई बार ज्ञापन और धरना-प्रदर्शन के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

बस अड्डे की हालत भी बेहद खराब है। वर्ष 1952 में बने इस पुराने स्टेशन का भवन जर्जर हो चुका है। जगह-जगह प्लास्टर उखड़ रहा है और बरसात के दौरान छत टपकती है।

कर्मचारियों को सीलन भरे कमरों में काम करना पड़ रहा है, जबकि महिला कर्मचारियों के लिए शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं। चालक-परिचालकों के लिए विश्राम कक्ष के नाम पर केवल दो लकड़ी के तख्त हैं।

यात्रियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बसों के आगमन-प्रस्थान की जानकारी देने के लिए कोई डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड नहीं है। पेयजल कूलर खराब पड़ा है और बैठने की समुचित व्यवस्था का अभाव है। दिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों के लिए रैंप, व्हीलचेयर और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।

डिपो में बसों की कमी भी बड़ी समस्या बनी हुई है। वर्तमान में लगभग 130 बसें संचालित हैं, जिनमें से कई तकनीकी रूप से कमजोर और जर्जर हैं। कई बसें बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है। चारधाम यात्रा के चलते कई बसों को अन्य रूटों पर भेजे जाने से स्थानीय रूट और प्रभावित हो गए हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि बस अड्डे पर उत्तराखंड की बसों से ज्यादा उत्तर प्रदेश की बसें खड़ी नजर आती हैं, जिससे पार्किंग और संचालन में दिक्कतें बढ़ रही हैं।

हालांकि ट्रांसपोर्ट नगर में लगभग 2.75 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक बस अड्डा बनाने का प्रस्ताव है, जिसमें प्रतीक्षालय, शौचालय, पार्किंग, चाइल्ड केयर सेंटर और अन्य सुविधाएं शामिल होंगी। लेकिन इस योजना का कार्य कब शुरू होगा, यह अब भी अनिश्चित बना हुआ है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें:

लंबित वेतन का तुरंत भुगतान

बस अड्डे पर बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था

जर्जर बसों की मरम्मत या नई बसों की उपलब्धता

डिजिटल डिस्प्ले और टिकटिंग सिस्टम का आधुनिकीकरण

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

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