देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने मेडिकल शिक्षा के बाद बांड की शर्तों का उल्लंघन करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के निर्देश पर पहली बार 26 डॉक्टरों के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी किए गए हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी के 13 पीजी डिग्रीधारक चिकित्सकों को बांड उल्लंघन पर 16 से 20 लाख रुपये तक की वसूली के नोटिस भेजे गए हैं। वहीं, राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर से एमबीबीएस करने के बाद सेवा शर्तों का पालन न करने वाले 13 चिकित्सकों पर 19 से 33 लाख रुपये तक की रिकवरी की कार्रवाई की गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में कुल 234 बांडधारी डॉक्टर वर्षों से अनुपस्थित हैं। इनमें राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के 83, दून मेडिकल कॉलेज के 56 और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के 95 चिकित्सक शामिल हैं, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद भी राज्य सेवा में नहीं लौटे।
नियमानुसार एमबीबीएस के बाद चिकित्सकों को पांच वर्ष दुर्गम या तीन वर्ष अति दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देना अनिवार्य है, लेकिन बड़ी संख्या में डॉक्टर इस अनुबंध को तोड़ रहे हैं। इसका सीधा असर पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है, जहां डॉक्टरों के पद खाली हैं और मरीजों को इलाज के लिए देहरादून व हल्द्वानी जैसे शहरों की ओर रेफर किया जा रहा है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग अब अगली सूची भी तैयार कर रहा है। बांड की शर्तों का पालन न करने वाले अन्य डॉक्टरों के खिलाफ भी जल्द आरसी जारी की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में राशि जमा न करने पर संबंधित चिकित्सकों की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इसमें बाधा बनने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

