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नैनीताल। मनोरा रेंज के जंगल पिछले करीब 70 घंटे से लगातार धधक रहे हैं। आग ने अब विकराल रूप ले लिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में धुएं का घना गुबार छा गया है।

हालात ऐसे हैं कि स्थानीय लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, गले में खराश और घुटन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं आग के रिहायशी इलाकों तक पहुंचने की आशंका से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार रविवार सुबह बल्दियाखान के समीप नैनागांव क्षेत्र में जंगल में आग लगी थी। इसके बाद आग धीरे-धीरे कलौना, पटवाडांगर और आरुखान क्षेत्र तक फैल गई। तेज धूप और लगातार चल रही हवाओं के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया। मंगलवार तक भी आग पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी। नैनागांव, बल्दियाखान, पटवाडांगर और आरुखान समेत आधा दर्जन गांवों से लगे वन क्षेत्र आग की चपेट में आ चुके हैं।

आग से कई हेक्टेयर वन संपदा के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। चीड़, बांज, बुरांश सहित कई महत्वपूर्ण वनस्पतियां जलकर नष्ट हो रही हैं। जंगल में लगी आग से वन्यजीवों पर भी संकट गहरा गया है। पक्षियों, खरगोश, कांकड़ और घुरड़ समेत कई छोटे वन्य जीव आग और धुएं से प्रभावित हो रहे हैं।

घने धुएं के चलते बुजुर्गों, बच्चों और दमा के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। कई इलाकों में दृश्यता भी प्रभावित हो रही है। हालांकि वन विभाग और दमकल विभाग की टीमें लगातार आग बुझाने में जुटी हुई हैं। कई स्थानों पर ग्रामीण भी वन कर्मियों के साथ मिलकर आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तेज हवाओं और सूखी वनस्पतियों के कारण स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

स्थानीय लोगों ने जंगलों में लगातार हो रही आग की घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।

लोगों का आरोप है कि वन विभाग की तैयारियां केवल कागजों तक सीमित थीं। पिछले तीन दिनों से जंगल धधक रहे हैं, लेकिन आग पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जा सका, जिससे विभागीय लापरवाही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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