नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) ने प्रसिद्ध उर्दू शायर और पद्मश्री सम्मानित साहित्यकार डॉ. बशीर बद्र के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। 91 वर्ष की आयु में उनका निधन होने से साहित्य और उर्दू शायरी जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
कूटा की ओर से जारी शोक संदेश में कहा गया कि डॉ. बशीर बद्र आधुनिक उर्दू शायरी के ऐसे महान हस्ताक्षर थे, जिन्होंने अपने शब्दों की संवेदनशीलता, गहराई और जीवंतता से करोड़ों लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया। उनकी ग़ज़लें और शेर आज भी लोगों की जुबान पर हैं और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।
कूटा ने उनकी चर्चित रचनाओं — “आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा”, “अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा”, “यूँ ही बे-सबब न फिरा करो”, “न जी भर के देखा न कुछ बात की”, “सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा”, “मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला”, “परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता” तथा “कोई हाथ भी ना मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से, ये नए मिजाज का शहर है जरा फासले से मिला करो” जैसी कालजयी ग़ज़लों को याद करते हुए कहा कि उनकी शायरी हमेशा साहित्य प्रेमियों के बीच जीवित रहेगी।
शोक व्यक्त करने वालों में प्रो. ललित तिवारी, डॉ. नीलू, डॉ. दीपक, डॉ. युगल जोशी, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. कुबेर गिनती, डॉ. शिवांगी, डॉ. दीपिका गोस्वामी, डॉ. अनिल बिष्ट, डॉ. अशोक कुमार तथा एलुमनी सेल के डॉ. बी.एस. कालाकोटी, डॉ. एस.एस. सामंत, डॉ. ज्योति कांडपाल, डॉ. मीना पांडे और डॉ. रितेश साह सहित अनेक शिक्षकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
कूटा ने कहा कि डॉ. बशीर बद्र का साहित्यिक योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और उनकी शायरी आने वाले समय में भी मानव संवेदनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बनी रहेगी।

