‘प्रशासनिक डेटा की क्षमता को अनलॉक करना’ विषय पर विशेषज्ञों ने साक्ष्य-आधारित सुशासन और डेटा सुरक्षा पर रखे विचार
नैनीताल। राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर डीएसबी कैंपस, कुमाऊं विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग द्वारा “प्रशासनिक डेटा की क्षमता को अनलॉक करना” (Unlocking Potential of Administrative Data) विषय पर ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, शोधार्थी तथा परास्नातक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
वेबिनार का उद्देश्य सरकारी विभागों में उपलब्ध प्रशासनिक रिकॉर्ड को एक रणनीतिक संसाधन के रूप में उपयोग कर साक्ष्य-आधारित सुशासन को बढ़ावा देना था।
मुख्य अतिथि एवं सांख्यिकी विभागाध्यक्ष प्रो. एम.सी. जोशी ने उद्घाटन संबोधन में सांख्यिकी के विभिन्न अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. स्पर्श भट्ट ने कहा कि प्रशासनिक डेटा एक छिपी हुई राष्ट्रीय संपत्ति है, जिसका सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग नीति निर्माण को अधिक तेज, सटीक और जनहितकारी बना सकता है।
वेबिनार में विशेषज्ञों ने प्रशासनिक डेटा के प्रभावी उपयोग के लिए डेटा इंटरऑपरेबिलिटी, गोपनीयता एवं सुरक्षा तथा स्थानीय स्तर पर डेटा साक्षरता जैसे तीन प्रमुख पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम के अनुपालन और ‘फाइव सेफ्स’ ढांचे के महत्व पर भी विचार रखे गए।
कार्यक्रम में भारत के आधार-संबद्ध डीबीटी, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), यूआईडीएआई, ब्रिटेन के एनएचएस तथा न्यूयॉर्क के शहरी नियोजन मॉडल जैसे सफल उदाहरणों के माध्यम से प्रशासनिक डेटा के उपयोग की उपयोगिता पर चर्चा की गई।
वेबिनार में पंकज शर्मा, भाविका लोहनी, कल्पना कोरंगा, कविता मेहता, कविता चौहान, मानसी सूठा, मेघा रानी, पूजा नायक, शिवानी नेगी, कल्पना रावत एवं कल्पना वालिया सहित अन्य प्रतिभागियों ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से अपने विचार साझा किए।
अंत में डॉ. भारत रत्न ने महान सांख्यिकीविद् प्रो. पी.सी. महालनोबिस के जीवन एवं सांख्यिकी के क्षेत्र में उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
वेबिनार का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि प्रशासनिक डेटा को सार्वजनिक हित का महत्वपूर्ण संसाधन मानते हुए देश के विकास और भविष्य की चुनौतियों के समाधान में प्रभावी रूप से उपयोग किया जाए।


