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‘हर गांव का यही पैगाम, एक पेड़ मां के नाम’ थीम के तहत बोए गए बॉज, देवदार, काफल, बुरांश समेत कई स्थानीय प्रजातियों के पौधे

नैनीताल। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला महोत्सव-2026 के अवसर पर नैनीताल वन प्रभाग के मंगोली क्षेत्र में गुरुवार को वृहद पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राज्य सरकार की थीम “हर गांव का यही पैगाम, एक पेड़ मां के नाम” के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता तथा उच्च न्यायालय के अन्य न्यायमूर्तियों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तराखंड का संदेश दिया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज तिवारी, न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठानी, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित, न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह ने भी पौधे लगाए। इस अवसर पर सभी न्यायमूर्तियों की धर्मपत्नी भी कार्यक्रम में शामिल हुईं और पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता निभाई।

पौधरोपण अभियान के दौरान बॉज, देवदार, पुतली, उतीस, कचनार, काफल, रुद्राक्ष, मेहल, पदम, पारिजात, दाड़िम, आंवला, तिमूर, मौलश्री, धौला और बुरांश सहित स्थानीय एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए।

इससे पूर्व नैनीताल वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी आकाश गंगवार ने मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्तियों का स्वागत किया। उन्होंने हरेला महोत्सव की थीम, राज्यव्यापी वृक्षारोपण अभियान के उद्देश्य तथा नैनीताल वन प्रभाग में पाई जाने वाली स्थानीय वृक्ष प्रजातियों की विशेषताओं की जानकारी भी दी।

कार्यक्रम में श्रीमती वंदना गुप्ता, श्रीमती मंजु तिवारी, श्रीमती शोभा मैठानी, श्रीमती राजेश्वरी पुरोहित, श्रीमती हरिप्रिया मेहरा, श्रीमती उमा उपाध्याय एवं श्रीमती दीप्ती शाह की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इसके अलावा रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता, बार एसोसिएशन नैनीताल के अध्यक्ष डी.सी.एस. रावत, अधिवक्ता चन्द्रशेखर जोशी, अपर महाधिवक्ता गणेश कांडपाल, स्थायी अधिवक्ता प्रदीप हेडिया, अधिवक्ता मयंक जोशी सहित उच्च न्यायालय के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

वन विभाग की ओर से उप निदेशक जू स्वाति, उप प्रभागीय वनाधिकारी ममता चंद, वन क्षेत्राधिकारी नितिन पंत, ललित मोहन कार्की, मनोज भगत, आनंद लाल आर्या सहित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

हरेला महोत्सव के इस आयोजन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण का संदेश देते हुए जनसामान्य से अधिक से अधिक पौधरोपण करने और उनकी देखभाल का आह्वान किया गया।

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