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हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी से कम शुल्क पर चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने वाले 69 बांडधारी डॉक्टरों के खिलाफ कॉलेज प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इन डॉक्टरों ने बांड की शर्तों के अनुसार सरकारी अस्पतालों, विशेषकर पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में निर्धारित अवधि तक सेवा नहीं दी। अब कॉलेज प्रशासन इनके खिलाफ लीगल नोटिस जारी करने की तैयारी में है।

जानकारी के अनुसार, बांडधारी डॉक्टरों में 41 एमबीबीएस और 28 पीजी (विशेषज्ञ) डॉक्टर शामिल हैं। मेडिकल कॉलेज में रियायती शुल्क पर पढ़ाई करने के बदले इन डॉक्टरों को तीन से पांच वर्ष तक राज्य के सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देना अनिवार्य होता है। यदि कोई डॉक्टर सेवा नहीं देता है तो उसे निर्धारित बांड राशि जमा करनी होती है।

स्वास्थ्य महानिदेशक के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने करीब एक माह पहले इन डॉक्टरों के खिलाफ राजस्व वसूली प्रमाण पत्र (आरसी) जारी किए थे। ये आरसी संबंधित जिलाधिकारियों के माध्यम से तहसीलदारों को भेजे गए, ताकि संबंधित डॉक्टरों से बांड की राशि की वसूली की जा सके।

कार्रवाई के बाद अब तक 20 डॉक्टरों ने बांड राशि जमा कर दी है। इनमें सात एमबीबीएस और 13 पीजी डॉक्टर शामिल हैं। इनसे कॉलेज को करीब 3.5 करोड़ रुपये की वसूली हुई है। वहीं एक डॉक्टर ने बांड के तहत अपनी सरकारी सेवा पूरी कर ली है।

इसके बावजूद 49 डॉक्टरों ने न तो बांड की राशि जमा की और न ही कॉलेज प्रशासन को कोई जवाब दिया। इनमें से 45 डॉक्टरों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जबकि चार डॉक्टर अपने स्थायी पते पर भी नहीं मिले, जिसके कारण तहसीलदार द्वारा भेजे गए नोटिस वापस कॉलेज प्रशासन को लौट आए।

स्थायी पते पर नहीं मिलने वाले डॉक्टरों में डा. नमिता वासीकोटी (पिथौरागढ़), डा. अनीका कुमारी (बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश), डा. सबरीन नाज (देहरादून) और डा. तेंजेन पेल्डेन (देहरादून) शामिल हैं। ये सभी एमबीबीएस पासआउट डॉक्टर हैं।

कॉलेज प्रशासन का कहना है कि बांड की शर्तों का पालन न करने से राज्य के सरकारी अस्पतालों, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अब बकाया डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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