मिजोरम, मेघालय, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से आए प्रशिक्षुओं ने देखा जिम कॉर्बेट का ऐतिहासिक घर और संग्रहालय
कालाढूंगी। कॉर्बेट नेशनल पार्क के 90 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कॉर्बेट ग्राम विकास समिति की ओर से कालाढूंगी स्थित कॉर्बेट संग्रहालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में एटीआई, हल्द्वानी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विभिन्न राज्यों के प्रशिक्षु रेंजर्स ने भाग लिया। मिजोरम, मेघालय, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से आए प्रशिक्षु रेंजर्स ने जिम कॉर्बेट की ऐतिहासिक विरासत को करीब से जाना और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
भ्रमण के दौरान प्रशिक्षु रेंजर्स को जिम कॉर्बेट के ऐतिहासिक घर का अवलोकन कराया गया।
इसके साथ ही उनके सहयोगी रहे मोती सिंह के घर तथा कॉर्बेट संग्रहालय का भी भ्रमण कराया गया। प्रशिक्षुओं ने संग्रहालय में रखी जिम कॉर्बेट से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुओं, उनके जीवन, वन्यजीवों के प्रति उनके दृष्टिकोण तथा संरक्षण कार्यों से संबंधित जानकारी हासिल की।
इस अवसर पर प्रशिक्षु रेंजर्स को बताया गया कि जिम कॉर्बेट का जीवन केवल वन्यजीवों से जुड़ा नहीं था, बल्कि स्थानीय समाज, प्रकृति और जंगलों के साथ उनका गहरा संबंध रहा। उनके संरक्षण संबंधी विचार आज भी वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता की दिशा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
भ्रमण के दौरान रेंजर्स ने स्थानीय सोविनियर शॉप का भी दौरा किया। यहां ग्रामीणों द्वारा तैयार किए गए स्थानीय उत्पादों और स्मृति-चिह्नों के बारे में जानकारी ली। प्रशिक्षु रेंजर्स ने स्थानीय उत्पादों की खरीदारी भी की, जिससे ग्रामीणों की आजीविका और स्थानीय स्तर पर रोजगार को प्रोत्साहन मिला। कार्यक्रम के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदाय को पर्यटन से जोड़ने और उनकी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम में कॉर्बेट ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष राजकुमार पांडे मौजूद रहे। विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों तथा जिम कॉर्बेट की विरासत से संबंधित जानकारी प्रशिक्षु रेंजर्स को नेचर गाइड पुरन सिंह बिष्ट ने दी। इस दौरान कॉर्बेट संग्रहालय प्रभारी सहित संग्रहालय का अन्य स्टाफ भी उपस्थित रहा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के अलग-अलग राज्यों से प्रशिक्षण के लिए आए रेंजर्स को जिम कॉर्बेट की ऐतिहासिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना, वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनके दृष्टिकोण को समझाना तथा वन्यजीव संरक्षण, ऐतिहासिक विरासत और स्थानीय समुदाय की आजीविका के बीच आपसी संबंध को सामने लाना रहा।
इस दौरान प्रशिक्षु रेंजर्स ने कॉर्बेट की विरासत और कालाढूंगी क्षेत्र की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान को लेकर भी रुचि दिखाई।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि किसी क्षेत्र की प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के साथ स्थानीय लोगों को उससे जोड़ना संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


