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एमबीपीजी कॉलेज में एआई पर राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू, गणितीय शोध एवं शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल पर प्रशिक्षण

गणितीय शोध एवं शिक्षा में एआई के इस्तेमाल पर विशेषज्ञों ने साझा की तकनीकी जानकारी, 40 छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने लिया प्रशिक्षण

हल्द्वानी। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी के बायोटेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस हॉल में “गणितीय शोध एवं शिक्षा के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शनिवार को शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का आयोजन 8 एवं 9 अगस्त 2026 को उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रायोजित मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत संचालित शोध परियोजना “AI Powered Innovation in Mathematical Research Education for Hilly Regions of Uttarakhand” के तहत किया जा रहा है।

कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नवीन तकनीकों से परिचित कराने के साथ ही गणितीय शोध, डेटा विश्लेषण, विषयवस्तु निर्माण और शिक्षा के क्षेत्र में एआई के प्रभावी एवं व्यावहारिक उपयोग के लिए सक्षम बनाना है।

कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह बनकोटी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। कार्यशाला के संयोजक डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह तथा सह-संयोजक डॉ. कामिका चौधरी ने कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। प्रथम दिवस के तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ. गोपाल दत्त, सहायक प्राध्यापक, स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी द्वारा किया गया।

तीन तकनीकी सत्रों में एआई के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण

कार्यशाला के प्रथम दिवस कुल तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में “फाउंडेशनल बैकग्राउंड—स्मार्ट तरीके से सीखें, अधिक मेहनत से नहीं” विषय पर प्रतिभागियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूलभूत अवधारणाओं से परिचित कराया गया। इस दौरान प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को एआई से बेहतर एवं प्रभावी परिणाम प्राप्त करने के तरीके समझाए गए।

दूसरे तकनीकी सत्र में कंटेंट क्रिएशन एवं वैलिडेशन पर विशेष चर्चा हुई। इसमें ChatGPT, Claude सहित विभिन्न एआई टूल्स की मदद से विषयवस्तु तैयार करने, प्राप्त जानकारी की विश्वसनीयता जांचने तथा उसके सत्यापन की प्रक्रिया के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि एआई से प्राप्त सामग्री का उपयोग करते समय तथ्यों की जांच और प्रमाणिकता सुनिश्चित करना क्यों आवश्यक है।

तीसरे सत्र में डेटा विश्लेषण, सार-संक्षेप एवं दृश्यांकन पर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान Claude, NotebookLM आदि एआई टूल्स के माध्यम से बड़े स्तर पर उपलब्ध डेटा से उपयोगी निष्कर्ष प्राप्त करने, उसका विश्लेषण करने तथा परिणामों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के व्यावहारिक तरीकों पर जानकारी साझा की गई।

हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण पर रहा विशेष जोर

कार्यशाला के प्रथम दिवस लगभग 40 छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय प्रतिभागियों को एआई टूल्स का प्रत्यक्ष एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

कार्यशाला के दौरान हैंड्स-ऑन एआई प्रदर्शन, शोध एवं शिक्षा के लिए उपयोगी एआई टूल्स तथा गणितीय शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि एआई का उपयोग शोध कार्यों को अधिक व्यवस्थित, प्रभावी और समयबद्ध बनाने के साथ-साथ डेटा के विश्लेषण एवं प्रस्तुतीकरण को भी आसान बना सकता है।

शोध और शिक्षा में नई संभावनाओं पर जोर

आयोजकों के अनुसार, वर्तमान दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा और शोध के क्षेत्र में तेजी से महत्वपूर्ण तकनीक के रूप में उभर रही है। ऐसे में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को एआई की क्षमताओं, उपयोग की सीमाओं और जिम्मेदार उपयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी देना आवश्यक है।

दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को गणितीय शोध एवं शिक्षा में एआई आधारित तकनीकों के उपयोग की जानकारी देने के साथ ही डेटा विश्लेषण, कंटेंट निर्माण, शोध सहयोग और नवीन शिक्षण पद्धतियों के लिए आधुनिक एआई टूल्स का इस्तेमाल सिखाया जा रहा है।

कार्यशाला का दूसरा दिवस भी विभिन्न तकनीकी गतिविधियों एवं प्रशिक्षण सत्रों के साथ आयोजित किया जाएगा।

आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा शोध एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

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