हल्द्वानी में खड़गे के कार्यक्रम के दौरान कथित अभद्र व्यवहार का विरोध, राज्य मंत्री शंकर कोरंगा ने सौंपा ज्ञापन
हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के दौरान एसएसपी कार्यालय में कथित अभद्र व्यवहार और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। मामले में सोमवार को राज्य मंत्री शंकर कोरंगा बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचे और एसपी सिटी को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण में कार्रवाई की मांग की।
राज्य मंत्री शंकर कोरंगा ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल द्वारा एसएसपी कार्यालय जैसे सार्वजनिक और जिम्मेदार संस्थान में कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के सार्वजनिक आचरण का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं से संयमित भाषा और मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
शंकर कोरंगा ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं और अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी विचारधारा एवं राय हो सकती है, लेकिन असहमति व्यक्त करने का तरीका लोकतांत्रिक और मर्यादित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर जनप्रतिनिधियों द्वारा आपत्तिजनक भाषा या अमर्यादित व्यवहार किए जाने से समाज में गलत संदेश जाता है।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि वरिष्ठ नेताओं का व्यवहार भावी पीढ़ी को भी प्रभावित करता है। यदि राजनीतिक और संवैधानिक पदों पर बैठे लोग सार्वजनिक मंचों अथवा सरकारी कार्यालयों में मर्यादा का पालन नहीं करेंगे तो इससे युवाओं और समाज के बीच गलत उदाहरण स्थापित होगा। उन्होंने ऐसी घटनाओं को समाज और भावी पीढ़ी के लिए नुकसानदेह बताया।
राज्य मंत्री ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी कार्यक्रम के दौरान दिए गए कथित बयान पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर अपनी भाषा और वक्तव्यों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उनके अनुसार, बड़े राजनीतिक और संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं के वक्तव्यों का जनता और समाज पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
शंकर कोरंगा ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन लोकतंत्र में संवाद, असहमति और विरोध सभी मर्यादा के दायरे में होने चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज होने के साथ आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं।



