श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने किया आयोजन, सभा के दौरान लगाए गए कथित नारों और टिप्पणियों पर जताई आपत्ति
शंखनाद सभा के बाद रामलीला मैदान में शुद्धि हवन, श्री राम सेना ने जताई धार्मिक पवित्रता प्रभावित होने पर नाराजगी
हल्द्वानी। रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की शंखनाद सभा के बाद अब मैदान की धार्मिक पवित्रता को लेकर शुद्धि हवन का आयोजन किया गया। श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ किया गया। आयोजन का नेतृत्व न्यास के सचिव राम जी अवस्थी ने किया।
आयोजकों का कहना है कि रामलीला मैदान हल्द्वानी का प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल है, जहां लंबे समय से रामलीला मंचन सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। ऐसे में इस स्थल की धार्मिक गरिमा और पवित्रता को बनाए रखना आवश्यक है।
न्यास से जुड़े पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की शंखनाद सभा के दौरान मंच से इस्लामिक नारे लगाए गए तथा ऐसे व्यक्ति को मंच प्रदान किया गया, जिसने हिंदू संगठनों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। आयोजकों ने इन घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा कि धार्मिक स्थल के स्वरूप वाले रामलीला मैदान में इस तरह की गतिविधियां उचित नहीं हैं।
इसी के विरोध और धार्मिक शुद्धि के उद्देश्य से रामलीला मैदान में हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से हवन किया गया और मैदान की शुद्धि एवं धार्मिक पवित्रता की पुनर्स्थापना की कामना की गई।
श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के सचिव राम जी अवस्थी ने कहा कि रामलीला मैदान केवल एक सार्वजनिक मैदान नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ा प्रमुख स्थल है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में ज्योतिषाचार्य पंडित मोहन शास्त्री, गिरीश पांडे, अंकित पाल, मीरा क्षोत्रिय, लता पंत, विजय फर्त्याल, अनमोल, कुलदीप सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। हवन के दौरान श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया।
रामलीला मैदान में हुए इस शुद्धि हवन को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
कांग्रेस की शंखनाद सभा और उसके बाद आयोजित धार्मिक आयोजन को लेकर दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। ऐसे में रामलीला मैदान एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी और धार्मिक-सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।



