पीपलकोटी (चमोली)। उत्तराखंड के चमोली जनपद स्थित पीपलकोटी में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में हुए भीषण हादसे के बाद पिछले लगभग पांच दिनों से चल रहा खोज एवं बचाव अभियान मंगलवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।
करीब 117 घंटे तक लगातार चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद टनल में फंसे सभी प्रभावित श्रमिकों को बाहर निकाल लिया गया। इस दर्दनाक हादसे में 12 श्रमिकों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 10 श्रमिकों की मौत हो गई। मृतकों के शव भी रेस्क्यू टीमों ने टनल से बाहर निकाल लिए हैं।
यह हादसा 13 अगस्त 2026 की शाम उस समय हुआ था, जब टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग में एचसीसी कंपनी के कर्मचारी कार्य कर रहे थे। अचानक टनल के भीतर पानी का तेज रिसाव शुरू हो गया और इसके साथ ही भारी मात्रा में मलबा व भूस्खलन होने से श्रमिक अंदर फंस गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उस समय करीब 22 श्रमिक टनल के भीतर मौजूद थे, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
सूचना मिलते ही शुरू हुआ बड़े स्तर का रेस्क्यू अभियान
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और विभिन्न आपदा राहत एजेंसियां तत्काल सक्रिय हो गईं। घटनास्थल पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, भारतीय सेना, डीडीआरएफ, सीआईएसएफ, पुलिस, टीएचडीसी तथा जिला प्रशासन की टीमें पहुंचीं और संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया गया।
टनल के भीतर लगातार भर रहे पानी, भारी मलबे और सीमित कार्यक्षेत्र के कारण रेस्क्यू अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। इसके बावजूद राहत एवं बचाव दलों ने दिन-रात बिना रुके अभियान जारी रखा और प्रत्येक संभावित स्थान पर फंसे श्रमिकों की तलाश की।
पानी, मलबा और फंसी मशीनें बनीं सबसे बड़ी चुनौती
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान टनल में जमा भारी मात्रा में पानी को बाहर निकालने के लिए उच्च क्षमता वाले सक्शन पंप और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए गए। साथ ही मलबा हटाने तथा सुरंग के भीतर फंसी मशीनरी को निकालने का कार्य भी लगातार चलता रहा।
रेस्क्यू टीमों ने अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकी संसाधनों की मदद से सुरंग के भीतर पहुंच बनाने का प्रयास किया। कई स्थानों पर मलबे की मोटी परतों को हटाने के बाद ही आगे बढ़ना संभव हो सका। कठिन परिस्थितियों के बावजूद टीमों ने अभियान की गति बनाए रखी और लापता श्रमिकों की खोज जारी रखी।
12 मजदूरों को नई जिंदगी, 10 परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
लगातार चले अभियान के दौरान कुल 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रशासन ने उनके स्वास्थ्य की निगरानी करते हुए आवश्यक उपचार की व्यवस्था की।
वहीं दूसरी ओर, रेस्क्यू टीमों ने टनल के भीतर फंसे 10 श्रमिकों के शव भी बरामद किए। हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं और पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। मृतकों के परिजनों में शोक की लहर है।
डीएम गौरव कुमार ने की अभियान की लगातार मॉनिटरिंग
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने पूरे रेस्क्यू अभियान की लगातार निगरानी की। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और विभिन्न एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय बनाते हुए अभियान की प्रगति पर नियमित समीक्षा की।
जिलाधिकारी ने सुनिश्चित किया कि सभी एजेंसियां एकजुट होकर कार्य करें और किसी भी प्रकार की तकनीकी या संसाधन संबंधी कमी रेस्क्यू अभियान में बाधा न बने। प्रशासन की ओर से प्रभावित श्रमिकों और उनके परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
कई एजेंसियों के समन्वय से पूरा हुआ अभियान
इस जटिल और लंबे रेस्क्यू अभियान में आईटीबीपी जोशीमठ, आईटीबीपी गौचर, भारतीय सेना जोशीमठ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, सीआईएसएफ, पुलिस, जिला प्रशासन और टीएचडीसी की टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी एजेंसियों ने बेहतर समन्वय और अथक प्रयासों के बल पर अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया।
करीब पांच दिनों तक चले इस ऑपरेशन ने एक बार फिर आपदा और आपात परिस्थितियों में राहत एजेंसियों की प्रतिबद्धता और क्षमता को साबित किया। हालांकि अभियान समाप्त होने के साथ ही 10 श्रमिकों की मौत ने इस हादसे को प्रदेश की सबसे दर्दनाक औद्योगिक दुर्घटनाओं में शामिल कर दिया है। प्रशासन अब हादसे के कारणों की विस्तृत जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों पर भी काम कर रहा है।










