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गौला-लधिया समेत प्रदेश की नदियों के पुनर्जीवन को मिलेगी रफ्तार, मंत्री ने प्रदेश भर की नदियों के पुनर्जीवीकरण एवं उपचार कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड में प्राकृतिक जल स्रोतों, धाराओं और नदियों के संरक्षण एवं पुनर्जीवीकरण की दिशा में सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं।

बुधवार को देहरादून में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में गौला और लधिया नदी सहित प्रदेश की अन्य नदियों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए तैयार की जा रही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जलागम विभाग के अंतर्गत गठित स्प्रिंग एंड रिवर रिजूविनेशन अथॉरिटी (SARRA) के माध्यम से प्रदेश और विशेष रूप से नैनीताल जनपद की गौला एवं लधिया नदियों के कैचमेंट क्षेत्रों के वैज्ञानिक उपचार और नदी पुनर्जीवीकरण का कार्य चरणबद्ध ढंग से संचालित किया जा रहा है। इसके तहत नदियों के संपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जा रहा है।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि सर्वेक्षण कार्य पूर्ण होने के बाद प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थान जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (GBPNIHE) द्वारा तकनीकी अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से डीपीआर तैयार कर विभिन्न क्षेत्रों में संरक्षण और उपचार संबंधी कार्य शुरू किए जाएंगे।

बैठक में बताया गया कि गौला और लधिया नदी तंत्र के अंतर्गत 19 सूक्ष्म जलागम क्षेत्र आते हैं, जिनमें लगभग 475 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। क्षेत्रफल की व्यापकता और सीमित संसाधनों के कारण सर्वेक्षण कार्य अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। हालांकि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर समन्वय से चयनित सूक्ष्म जलागम क्षेत्रों की कई ग्राम पंचायतों में सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है।

कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि चयन प्रक्रिया और सर्वेक्षण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाते हुए एक माह के भीतर आवश्यक कार्यवाही पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण राज्य की पर्यावरणीय सुरक्षा तथा भविष्य की जल आवश्यकताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बैठक के दौरान जलागम विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत आयोजित क्षमता विकास कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण सामग्री वितरण के लिए उपयोग किए जाने वाले बैगों पर संबंधित परियोजना और विभाग का लोगो अंकित किया जाए तथा प्लास्टिक के स्थान पर जूट या कपड़े से बने पर्यावरण-अनुकूल बैगों का ही उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न जनपदों में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों और उपलब्धियों के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता भी बताई। मंत्री ने कहा कि जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और जलागम विकास से जुड़े कार्यों की जानकारी आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जानी चाहिए, ताकि लोगों की भागीदारी भी बढ़ सके।

बैठक में विश्व बैंक पोषित यूसीआरआरएफपी (UCRRFP) परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने परियोजना के अंतर्गत लंबित प्रावधानों से संबंधित कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही नैनीताल समेत परियोजना से आच्छादित ग्राम पंचायतों में द्वितीय चरण की अभिमुखीकरण कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।

इसके अलावा परियोजना के तहत चयनित सीमांत और कमजोर वर्ग के व्यक्तियों तथा समूहों को आय सृजन गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया।

बैठक के अंत में मंत्री राम सिंह कैड़ा ने अधिकारियों से निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा जताई। सचिव जलागम, उत्तराखंड शासन दिलीप जावरकर ने भी संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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