नैनीताल/मुंबई। राम निरंजन झुनझुनवाला कॉलेज, घाटकोपर (मुंबई) में आयोजित एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम में प्राकृतिक संसाधनों से औषधियों के विकास विषय पर विद्यार्थियों के साथ संवाद किया गया।
इस अवसर पर वक्ता ने युवा छात्रों को प्रकृति, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व से अवगत कराते हुए बताया कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में अनेक महत्वपूर्ण औषधियां प्राकृतिक स्रोतों से विकसित की गई हैं और भविष्य में भी प्राकृतिक संसाधन नई दवाओं की खोज का आधार बन सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के साथ हुए संवाद को अत्यंत प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक बताया गया। वक्ता ने कहा कि युवा ही देश का भविष्य हैं और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना विकसित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार और प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने औषधीय पौधों, जैव विविधता, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक औषधि निर्माण से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। छात्रों की जिज्ञासा, सीखने की उत्सुकता और सकारात्मक सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष रूप से सार्थक और प्रभावशाली बना दिया।
इस अवसर पर कॉलेज की निदेशक डॉ. उषा मुकुंदन एवं प्राचार्य डॉ. हिमांशु दावा ने अतिथि वक्ता का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में ऐसे संवाद कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और शोध आधारित दृष्टिकोण भी मिलना चाहिए।
कार्यक्रम के सफल संचालन और आतिथ्य में विभाग के प्रोफेसर डॉ. अनिल तथा सह-प्रोफेसर डॉ. सोमनाथ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके सहयोग और आत्मीय व्यवहार की विशेष सराहना की गई।
कार्यक्रम का एक भावनात्मक पक्ष भी रहा। कॉलेज के मास कम्युनिकेशन विभाग की प्रमुख डॉ. पूजा भारद्वाज, जो वक्ता के पूर्व सहकर्मी और मित्र की सुपुत्री हैं, ने अत्यंत आत्मीयता के साथ स्वागत एवं सम्मान किया। उनके स्नेहपूर्ण व्यवहार ने इस अवसर को और अधिक यादगार बना दिया।
लगभग 12 हजार विद्यार्थियों की छात्र संख्या वाले राम निरंजन झुनझुनवाला कॉलेज को मुंबई के पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। ऐसे विशाल और ख्यातिप्राप्त शिक्षण संस्थान में प्रकृति, औषधीय संसाधनों और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा करने का अवसर मिलना वक्ता के लिए गर्व, संतोष और आनंद का विषय रहा।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से समाज और मानवता के हित में कार्य करने का संकल्प भी व्यक्त किया।










